Showing posts with label Anand Bakshi. Show all posts
Showing posts with label Anand Bakshi. Show all posts

Saturday, June 24, 2023

ये जो हुआ

ये जो हुआ 

भला है, ना बुरा

फिर भला क्यूँ डरे?

फिर भला हम क्यूँ रूके?


हर तरफ़ है धुआँ 

दिल का तार बज उठा

देखो गौर से

आते-जाते राहगीर 

रूकते नहीं कोई पीर

देखो मौज है

आना-जाना रीत है 

यूँही जाती बीत है 

सारी ज़िंदगी 


ज़िन्दगी चलती है 

लेकर साथ चलती है 

अपनी धार को

सूखती जाए

भरती जाए 

अपनी धार को

पर्वतों को देख कर

साहिलों को देख कर

रूकती है नहीं 


राहुल उपाध्याय । 24 जून 2023 । सिएटल 

Friday, May 21, 2021

मुबारक हो सबको ये टीका लगाना

https://youtu.be/t_HppQvDl9s 


मुबारक हो सबको टीका लगाना 

मैं ख़ुश हूँ मेरे साथ सभी सुर मिलाना

मैं तो दीवाना दीवाना दीवाना

मैं तो दीवाना दीवाना दीवाना


हज़ारों तरह के ये होते हैं दुखड़े

अगर मन में दम हो तो मिटते हैं दुखड़े

खुशी के पलों में बदलते हैं दुखड़े

इनसे हार सकता नहीं ये ज़माना


ये पुरवाईयाँ दे रही हैं बधाई 

आओ बाल-बच्चों करो रे पढ़ाई 

बेरोज़गार न बैठो करो रे कमाई

चलो आज चल दो करो न बहाना


ये बोले समय की नदी का बहाव

वो सुनसान गलियाँ वो सूने से गाँव 

थीं सब कल की बातें उन्हें भूल जाओ

न फिर याद करना, न मुझको दिलाना 


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 19 मई 2021 । सिएटल 

Sunday, March 7, 2021

यूँ कर तेरे मन को

https://youtu.be/QDfpxZcL3Is 

यूँ कर तेरे मन को

जैसे बहता हो शिकारा

रंगीं हो ये मौसम

लगे प्यारा जग सारा


सारा तेरा जीवन ये

प्यार से यूँ छलके

ख़ुश रहे तब तक तू

जब तक खुली पलकें 

तू ही तेरा जीवन

तू ही तेरा सहारा


गाए जा जीवन भर

ख़ुशियों भरे नग़मे 

मिले जो ग़म भी तो

तार उन्हें हँस के

तू ही तेरा नायक

तू ही तेरा सहारा

यूँ कर तेरे मन को


(आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 7 मार्च 2021 । सिएटल



Tuesday, February 16, 2021

मेरे मैनेजर


https://youtu.be/VIbLit_vLbY 


मेरे दिल से ओ मैनेजर

तूने अच्छी दिल्लगी की है

के बन के बॉस

अपने वर्कर से

बेवफ़ाई की है


मेरे मैनेजर तू मेरी 

क्वालिफ़िकेशन्स को तरसे

मुझे कम देने वाले 

तू भी फ्रेक्शन्स को तरसे


तू फूल बने पतझड़ का, 

तुझपे बहार न आए कभी

मेरी ही तरह तू तड़पे

तुझको क़रार न आए कभी

सड़े तू इस तरह कि 

रिकॉग्निशन्स को तरसे


तेरे ऑप्शन्स एेसे डूबे 

उनका भी कोई दाम न हो

तेरे ग्रुप के पास बेदर्दी 

कोई बिलेबल काम न हो

तू फन्ड्स तो क्या 

किसी की डोनेशन्स को तरसे


तेरे घर से भी ज़्यादा 

वीरां कोई वीराना न हो

तू भटके उम्र भर तेरा 

दुनिया में कोई ठिकाना न हो

तू ग्रीन कार्ड तो क्या 

विसा एच-वन को तरसे


(आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 2001 । सेन फ्रांसिस्को 


Monday, February 15, 2021

प्रभु तुम याद आए

https://youtu.be/ud02SDVOeJw


जब-जब क़हर बरसा

और फूल मुरझाए

प्रभु तुम याद आए


जब-जब ज़हर फैला

दंगों ने घर जलाए

प्रभु तुम याद आए


अपना कोई तराना

हमने नहीं बनाया

किसी और के ही कल से

हमने है कल बनाया


जब-जब उखाड़े मुर्दे

और ज़िंदे हैं जलाए

प्रभु तुम याद आए


फैलाने नूर तेरा

हमने हैं घर जलाए

पूजा हो तेरी जमकर

आडंबर और बढ़ाए 


जब-जब ढहाए मंदिर

और महल हैं बनाए

प्रभु तुम याद आए


जीवन है क्या इसको

हमने कभी ना जाना

सब हैं यहाँ मुसाफ़िर

सबको है दूर जाना

जब राज़ खुलता जाए

और उमर ढलती जाए

प्रभु तुम याद आए


(आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 15 फ़रवरी 2021 । सिएटल 

Thursday, February 4, 2021

भटका जहान है

https://youtu.be/MmdeZE_bsVM 


दुनिया में देखो फैला कैसा अज्ञान है

भटके हैं सब, भटका जहान है


चाहे बुझा दे कोई दीपक सारे

प्रीत बिछाती जाए राहों में तारे

फिर भी प्रेम से डरता इंसान है


डूबे ही रहते हैं नशे में सारे

इस-उस की जय करते  साँझ-सकारे

शक्ति से ख़ुद की ख़ुद ही अनजान है


आँखें झुका के वो करता है बातें

हाथ फैला के बस भीख ही माँगे

घंटी बजा कर घंटों करता गुणगान है


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 4 फ़रवरी 2021 । सिएटल 


Monday, January 11, 2021

मैंने पूछा गुगल से

मैंने पूछा गुगल से कि देखा है कहीं

हमारे ट्रम्प सा दुखी

गुगल ने कहा सर्च की क़सम

नहीं, नहीं, नहीं


मैंने ये हिसाब तेरा देखा

हर जगह ख़राब तेरा देखा

ट्वीटर पे ट्वीट तेरी देखी

सब में तेज़ाब तेरा देखा

मैंने पूछा ट्वीटर से फ़लक़ हो या ज़मीं

ऐसा पंछी है कहीं

ट्वीटर ने कहा हर ट्वीट की क़सम

नहीं, नहीं, नहीं


झूठ रोज़-रोज़ तू बके है

सुन-सुन के कान भी पके हैं

पद नहीं रियासत खुद की

समझ के नशे मे तू रहे है

मैंने पूछा जाम से फ़लक़ हो या ज़मीं

ऐसी मय भी है कहीं

जाम ने कहा, मयकशी की क़सम

नहीं, नहीं, नहीं


बदनामी जो तूने पाई

लुट गई ख़ुदा की बस ख़ुदाई

कौड़ी का शैतान कहूँ तुझे मैं

या कहूँ जहान की तबाही 

मैं जो पूछूँ फ़ेसबुक से ऐसा अप्रिय 

इन्सान है कहीं

फ़ेसबुक कहे लाईक की क़सम

नहीं, नहीं, नहीं


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय ।11 जनवरी 2021 । सिएटल 

Tuesday, December 29, 2020

इक साल आए, इक साल जाए

पूरा गीत यहाँ सुनें:

https://youtu.be/fSUd0MdrbEM 


इक साल आए, इक साल जाए

रोग बदले ना बदले नसीब


तक-तक सूने मन्दिर 

रातें बीत गईं

मोहन भी न मोहे मोहे 

कैसी प्रीत भई

तरस दरस नैन बरसे जाए


घर पे पढ़ते बच्चे 

कमाई कौन करे

बीमार पड़े कल तो 

दवाई कौन करे

माँ की ममता नीर बहाए


टीका सब कुछ 

टीके पे सारा छोड़ दिया

है दुख क्या, सुख क्या, 

सोचना छोड़ दिया

हमको जीना कौन सिखाए


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 29 दिसम्बर 2020 । सिएटल 



Saturday, December 26, 2020

अलविदा 2020

पूरा गीत यहाँ सुनें:

https://youtu.be/Z9twdHDZbVg 


उन्नीस की ग़लती को 

थोप के इंसान ने दुनिया में

तुझको किया बदनाम 

इस झूठ की दुनिया को 

छोड़ के जाता जा प्यारे

भूल के सब इलज़ाम 


जब जानवर कोई, इंसान को मारे

कहते हैं दुनिया में, वहशी उसे सारे

इक जानवर को खा के 

आज इंसानों ने किए

जीवन अपने हराम

तुझको किया बदनाम 


बस आखिरी सुन ले, ये मेल है अपना

बस ख़त्म ऐ साथी, ये खेल है अपना

अब साथ में लेता जा

इस अदने शायर का

प्यार भरा सलाम


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 26 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

Saturday, December 19, 2020

वैक्सीन आई है

वैक्सीन आई है, आई है, वैक्सीन आई है

बड़े दिनों के बाद, एक ग़रीब की याद

जगत को अब क्यों आई है


पहले मेरा हाथ लिया है...

उस पे निशाना दाग दिया है


ओ धन-दौलत पे मरने वाले

इतनी दया क्यूँ मेरे खाते


नौकरी देने की जब थी बारी

भूल गया क्यूँ तू ज़िम्मेदारी


सारे रिश्ते तूने तोड़े

आँख में आँसू तूने छोड़े


कम खाते हैं कम सोते हैं

बहुत ज़्यादा हम रोते हैं 


सूनी हो गईं शहर की गलियाँ

कांटे बन गईं बाग की कलियाँ


बंद हुए सावन के झूले

उजड़े आंगन, बुझ गए चूल्हे


अब के बरस जब आई दीवाली

दीप नहीं दिल जले हैं खाली


रंग बिना जब आई होली

रोली लगा के बेटी रो ली


पीपल सूना, पनघट सूना

घर शमशान का बना नमूना


ना फ़सल कटी आई बैसाखी

अब तो क्या रह गया है बाकी


पहले जब भी फूल खिलते थे

मिल-जुल के हम सब खिलते थे


बंद हुआ ये मेल भी अब तो

खतम हुआ ये खेल भी अब तो


डोली में जब बैठी बहना

रस्ता देख रहे थे नैना


मैं तो भाई हूँ मेरा क्या है

इसकी माँ का हाल बुरा है


बजनी थी वहाँ जब शहनाई

छाई थी वहाँ भीषण तन्हाई


तूने पैसा बहुत कमाया

पैसे ने फिर लोभ बढ़ाया


हम पंछी पिंजरे में बैठे

जैसे चाहे तू पैसे ऐंठे


माना उमर बहुत है छोटी

इसकी भी तो क़ीमत होगी


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

वीडियो यहाँ देखें/सुनें: https://youtu.be/k6s23D6iUEc


Wednesday, December 16, 2020

डॉक्टर बुला रहे हैं

डॉक्टर बुला रहे हैं

टीके लगा रहे हैं

लगाना ही लाज़मी है

लगाते ही जा रहे हैं


देखो ये रोग 

है महारोग

भागे भगाए न भागे

डरे न डॉक्टर 

लड़े वो जमकर

हरदम बढ़े वो आगे

बढ़ते ही जा रहे हैं

लड़ते ही जा रहे हैं


लगा कर मास्क

धो कर के हाथ

कब तक बचोगे लोगो

सोचो न बात

दिन हो के रात

जैसे ही मिले लगा लो

फ़ायदे  ही फ़ायदे हैं

एक्सपर्ट बता रहे हैं


आते थे लोग       

जाते थे लोग   

लगते थे रोज़ मेले

कोविड के बाद    

हुए बर्बाद

पड़ गए हम अकेले

टीक लगे जिन्हें  

नगमे वो गा रहे हैं 


डॉक्टर को देख 

ऐसे हैं नेक

अच्छा बुरा न देखे

डॉक्टर को देख 

ऐसे हैं नेक

अच्छा बुरा न देखे

सब का उपचार

दुश्मन के यार

सबको एक सा देखे

जीना सिखा रहे हैं

लड़ना सिखा रहे हैं


दवा का नाम 

ना कर बदनाम

इल्ज़ाम लगा न झूठे

हिम्मत न हार 

हो जा तैयार

आ लगवा ले टीके

शक मिट जाए सारे

वो परिणाम आ रहे हैं


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/Ue9kfUmMlZI 


Friday, December 4, 2020

वैक्सीन की बात चली तो


कुछ की जेबें भरेंगी 

बाक़ी सब आह भरेंगे 

वैक्सीन की बात चली तो

शक-शुबहा साथ चलेंगे

           

कहीं इसकी है वैक्सीन 

कहीं उसकी है वैक्सीन

कहाँ तो एक नहीं थी

अब हज़ारों हैं वैक्सीन 

कौन सी अच्छी-बुरी है

कैसे हम जाँच लेंगे


जैसे अब तक बचे हैं

वैसे बचते रहेंगे

हाथ धोते रहे हैं

हाथ धोते रहेंगे

वैक्सीन की क्या ज़रूरत 

अक़्ल से काम लेंगे 


हर तरफ़ बाज़ार नरम है

इलाज का बाज़ार गरम है

इनका है क्या भरोसा

इनका न ईमान-धरम है

मरीज़ मरता है तो मर जाए

ये तो नोट छाप लेंगे


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 3 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/BtvcArRUOq4