Wednesday, August 26, 2026

सागर जो होता

सागर जो होता 

लंगड़े सा मीठा 

नदियाँ न करतीं 

सागर का पीछा 


उद्दंडता ही अंक में

सब को है भरनी

नहीं मोल कोई 

यहाँ सादगी का


राधा भी कोई 

अपवाद नहीं है

उसने भी चाहा जो 

चुराए वस्त्र सभी का 


रुक्मणी के व्रत भी 

कहाँ काम आए? 

राधा को ही दे सब 

मान संगनी का 


वफ़ाओं का पट्टा 

गले पड़ गया है

सभ्यता का सबक 

जब से है सीखा 


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल 








इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


0 comments: