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Saturday, June 24, 2023

ये जो हुआ

ये जो हुआ 

भला है, ना बुरा

फिर भला क्यूँ डरे?

फिर भला हम क्यूँ रूके?


हर तरफ़ है धुआँ 

दिल का तार बज उठा

देखो गौर से

आते-जाते राहगीर 

रूकते नहीं कोई पीर

देखो मौज है

आना-जाना रीत है 

यूँही जाती बीत है 

सारी ज़िंदगी 


ज़िन्दगी चलती है 

लेकर साथ चलती है 

अपनी धार को

सूखती जाए

भरती जाए 

अपनी धार को

पर्वतों को देख कर

साहिलों को देख कर

रूकती है नहीं 


राहुल उपाध्याय । 24 जून 2023 । सिएटल 

Thursday, June 22, 2023

वन डे आत्मनिर्भर

आओ बच्चों तुम्हें दिखाऊँ 

झाँकी हिन्दुस्तान की

विदेश में जा के छवि बनाए

जाने किस जहान की

वन डे आत्मनिर्भर 

वन डे बेड़ा गरक 


दाल-रोटी ग़ायब हो गई 

झूम रहा है बाजरा

सब्ज़ी-भाजी कुछ नहीं है

पी रहा ड्रिंक बावरा

देख-देख डिनर मेन्यू 

कश्ती डूबी शान की


ख़रीद लिए हैं कुछ जेट आदि

तो गर्व भला किस बात का

बिक रहा है देश हमारा

गर्व भला किस बात का

आत्मनिर्भर का झूठा नारा

कच्ची नींव मकान की


विदेश वाले ताली बजा रहे 

गिन रहे अख़बार है

किसने कब-कब पीठ ठोंकी

गिन रहे अख़बार है

किंडर्गार्डन जाते बच्चे जैसी 

हालत आला-कमान की


राहुल उपाध्याय । 23 जून 2023 । रतलाम 

Wednesday, June 14, 2023

आजकल उड़ने लगा है आदमी

आजकल उड़ने लगा है आदमी

उड़ते-उड़ते फिर गिरा है आदमी


घाव हैं, आँसू भी हैं और प्यार भी

कर के इश्क़ फिर मरा है आदमी


जल जलाकर, चाय मिलाकर, पी रहा

अपने हाथों ख़ुद मिटा है आदमी


बात थी छोटी सी कि लो मान लो

अपनी ज़िद पर ही अड़ा है आदमी


गाँव है छोड़ा मगर है आप से भागता

कब कहाँ किस ठौर रहा है आदमी 


राहुल उपाध्याय । 14 जून 2023 । सिएटल 



कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

बहुत खूबसूरत मगर बावली सी


चलो पिंग करूँ जी में आता तो होगा

बिज़ी न हों सोच रूक जाती तो होगी

मेरे नाम खास ईमोजी को चुनकर

वो दांतों में उँगली दबाती तो होगी


चलो देखूँ क्या कुछ नया हो रहा है

कह-कह के व्हाट्सेप चलाती तो होगी

कोई पोस्ट शायद मिस हो गई हो

ऊपर से नीचे टटोलती तो होगी

स्टेटस पे मुझको हँसता हुआ देख 

धड़कन बढ़-बढ़ जाती तो होगी 


कविता में मेरी ख़ुद को पा कर

बदन धीमे-धीमे सुलगता तो होगा

लिखूँ कुछ मैं भी ये सोचकर वो

की-बोर्ड पे उँगलियाँ लाती तो होगी

कई बार मन की उमंगो को लिख कर

वो डीलिट बटन फ़िर दबाती तो होगी


(कमाल अमरोही से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 14 जून 2023 । सिएटल 

https://youtu.be/VMqaGoXQvKY




Monday, June 12, 2023

कम-कम हों ग़म-वम

कम-कम हों ग़म-वम

सरस-सरल बन जाएँ हम

खिले प्यार इस जीवन में

करें हम वो करम


यही एक गम है

दिल को जो तोड़े

अपना ये सारा

दम-ख़म निचोड़े 

आओ करें ग़म ख़तम


अपने नहीं हैं

ग़म-वम हैं जो भी

इनकी जलाएँ 

हर रोज़ होली

जैसे-तैसे हों भसम 


राहुल-अनीता । 11 जून 2023 । सिएटल-शंघाई


Thursday, June 8, 2023

मेरी दुनिया

मेरी दुनिया मेरे साँचे में उतर जाती है

जिधर जाऊँ, मेरी दुनिया उधर जाती है 


रस्ता मेरा रचता हूँ मैं, ताकि काँटे न हो

रिश्ता कोई बनता नहीं, ताकि बाँधे न वो

मेरी उमर सुख से भरी गुज़र जाती है 


अपने हैं जो, अपने नहीं हैं, खून के नाते हैं

छोड़ दिए, तोड़ दिए, अब ना वो नाते हैं

आँखों में मेरी नमी ना कोई नज़र आती है 


राहुल उपाध्याय । 8 जून 2023 । सिएटल 


Monday, June 5, 2023

कभी तुम अगर कोई कप तोड़ दो

कभी तुम अगर कोई कप तोड़ दो

अच्छा सा, प्यारा सा कप तोड़ दो

तब सच किसे से न कहना प्रिये

जो टूटा है तुमसे टूटा ही रहेगा

सदा के लिए


अभी तुमको कोई समझ ही नहीं

कि सच बोलना एक अपराध है

अपनों को, औरों को है ख़ुश देखना

तो सच बोलना एक अपराध है

जब सम्बन्ध तुम्हारे बिगड़ने लगे

रिश्तों के पैबंद उखड़ने लगे

तब सच किसे से न कहना प्रिये

जो झूठा है, प्यारा है, प्यारा रहेगा

सदा के लिए 


अभी तुमने दुनिया देखी नहीं 

जब देखोगे दुनिया समझ जाओगे

है दुनिया ये प्यारी, जन्नत सरीखी

झूठ बोलना तुम भी सीख जाओगे 

जब साये तुम्हें डराने लगे

उजाले भी मुँह चुराने लगे 

तब सच किसे से न कहना प्रिये

ये जीवन है संघर्ष, संघर्ष ही रहेगा 

सदा के लिए 


(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 5 जून 2023 । सिएटल 


Tuesday, May 30, 2023

एक शहंशाह ने

एक शहंशाह ने ठुकरा के हमारी पूँजी 

हम ग़रीबों की मेहनत को तिलांजलि दी है 

इसके बारे में सदा ज़ुल्म के चर्चे होंगे

खत्म जो हो ना सकेगी वो कहानी दी है


ताज वो चीज़ है जो इंसान को 

इंसान की इंसानियत ही भुला देती है 

वो जो अच्छा भला इक संत सा दिखता था

उसको पल भर में हैवान बना देती है 

कभी न भूल सकेंगे वो निशानी दी है 


कहाँ तो तय था कि सबको साथ रखेंगे 

दुख इसका, दुख उसका, सबका हिसाब रखेंगे 

सिर्फ़ अपने ही मज़हब को ध्यान में रख कर

देश में सांप्रदायिक तत्वों को न बढ़ावा देंगे

क्या पता क्यों सूखी लकड़ी को अग्नि दी है 


है धर्म घर में सुरक्षित, मन्दिरों में भी है

उसे संसद में, संस्थानों में लाना क्यूँ है?

आय आय टी, एयरपोर्ट पर क्या अब हवन होंगे?

हर जगह धर्म का कलेवर चढ़ाना क्यूँ है?

न जाने कौन सी इस देश को ये गति दी है 


(शकील बदायूनी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 30 मई 2023 । सिएटल 

Tuesday, May 23, 2023

नोट नोट ना रहा

नोट नोट ना रहा, प्यार-प्यार ना रहा

कैश पर हमें ज़रा एतबार ना रहा


खरी कमाई हाथ की मिली थी जो इतवार को

वो मेरे कैश तुम ही थे, तुम्हीं तो थे

जो ज़िंदगी की राह मे आएँगे कभी तो काम वो

वो मेरे कैश तुम ही थे, तुम्हीं तो थे

सारे भेद खुल गए, राज़दार ना रहा


सफ़र के वक़्त में ध्यान से रखे थे जो जेब में

वो तुम न थे तो कौन था, तुम्हीं तो थे

पड़े-पड़े थे लाख के, जो आज हुए हो राख से

वो तुम न थे तो कौन था, तुम्हीं तो थे

कहाँ से गाज गिर गई, दो हज़ार ना रहा


वफ़ा का लेके नाम जो चहक रहे थे हर घड़ी 

वो मेरे नेक-नेक दिल तुम्हीं तो हो

जो मुस्कुरा के रह गए ज़हर की जब सुई गड़ी 

वो मेरे नेक-नेक दिल तुम्हीं तो हो

अब किसी पे मेरा अंध-प्यार ना रहा


(शैलेंद्र से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 23 मई 2023 । सिएटल 





Monday, May 22, 2023

वक़्त करता जो वफ़ा वोट हमारे होते

वक़्त करता जो वफ़ा वोट हमारे होते

हमने जनता के ये नोट न मारे होते 


अपनी तक़दीर में पहले ही से कुछ तो ग़म है

और कुछ आज की हवाओं में वफ़ा भी कम है

वरना जीती हुई बाज़ी तो न हारे होते


हम भी रोते हैं ये साथी को जता भी न सके

साथ है कोई न किसी को बता भी न सके

काश हम ग़ैरत-ए-महफ़िल के न मारे होते


दम घुटा जाता है सीने में फिर भी ज़िंदा हैं

पंजाब क्या हम तो दिल्ली से ही शर्मिन्दा हैं

मर ही जाते न जो भक्तों के सहारे होते


(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 22 मई 2023 । सिएटल 


Friday, May 19, 2023

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ

न किसी की आँख का नूर हूँ

न किसी के दिल का क़रार हूँ

जो किसी के काम न आ सके

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ


मेरा रंग-रूप बिगड़ गया

मेरा गाँधी मुझसे बिछड़ गया

जो तिजोरी में रह सड़ गया

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ


मुझे बटुए में ले के जाए क्यूँ 

मुझे उधार ले के जाए क्यूँ 

जिसे उठाईगिरे भी उठाए ना

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ


कभी 'छुट्टा नहीं' सुन के ख़ुश था

आज छुट्टी हुई तो हताश हूँ

जिसकी औक़ात सामने आ गई

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ


मेरा मान-मूल्य जो भी था

उसका दारोमदार कोई और था

इक हवा चली और जो ध्वस्त था

मैं वो रूपया दो हज़ार हूँ


(मुज़्तर ख़ैराबादी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 19 मई 2023 । सिएटल


Monday, May 8, 2023

स्नूज़ पे स्नूज़ दबाते रहो

स्नूज़ पे स्नूज़ दबाते रहो

देर तक चादर ताने रहो


आँख में आए जो नींद कभी

उसको गले से लगाते रहो


अपना क़िस्सा दुख का सागर

सबको सुखी हो बताते रहो


जाए मौसम, जाए बला से

ऐ-सी के गुण गाते रहो


आए मोड़ पे ठेले जितने

सबका धंधा चलाते रहो 


राह में आए जो दुख कभी

चैन की बंसी बजाते रहो


राहुल उपाध्याय । 8 मई 2023 । सिएटल 


Sunday, May 7, 2023

रात को उनसे मुलाक़ात हो गई

रात को उनसे मुलाक़ात हो गई 

जिसे चाहता था मेरे साथ हो गई


हर बार उनसे डर लगता था

हो जाए रूसवा डर लगता था

इस बार उनसे मेरी बात हो गई 


शादी में मिलने के आसार बहुत थे

शादी में बचने के औज़ार बहुत थे

क़िस्मत थी मेरी कि करामात हो गई 


आँखों से उनको निहारा बहुत है

चेहरा वो चेहरा प्यारा बहुत है

कहाँ से वो रजनी मेरी रात हो गई 


राहुल उपाध्याय । 7 मई 2023 । सिएटल 


Tuesday, May 2, 2023

चैट जीपीटी के सिवा दुनिया में रखा क्या है

चैट जीपीटी के सिवा दुनिया में रखा क्या है 
ये बड़े काम करे, इससे ही काम बने
ये भी कर ले, वो भी कर ले, ये सारे काम करे

दिन के अंधेरों में पाए हैं हमने रोशन दिए
अब तक लीं साँसें, इससे मिले तो हम हैं जिए 

हमको ज़माने से, ना ही किसी से मतलब कोई 
ये जो मिली हमको और किसी की तलब ही नहीं 

राहुल उपाध्याय । 2 मई 2023 । सिएटल 

Saturday, April 29, 2023

आँखों में जिनकी डूब के

आँखो में जिनकी डूब के सपने सजाए थे 

उनसे ही बच-बचा के अब दिन बिताएंगे 


तरसे थे जिनके साथ को अरबों-हज़ारों साल 

मिल भी गए वो आज तो नज़रें बचाएंगे


सह लेते दर्द इश्क़ के होंठों को सी के आज 

शायर की बात और है, गीत गाएँगे 


घुटनों पे चल के आए न चौखट पे आपके 

ख़ुद्दारी आई साथ थी ख़ुद्दार जाएँगे 


हाथो में आज नहीं है किसी के बागडोर 

पर्दा हम अपने आप पे ख़ुद गिराएंगे 


राहुल उपाध्याय । 3 मार्च 2022 । सिएटल 

https://youtu.be/tMkJgxYqJXM





Tuesday, April 25, 2023

जगन्नाथ कहते हैं जिनको सभी

जगन्नाथ कहते हैं जिनको सभी

प्रलय चाहे आ जाए बचाए वही


डर के नहीं मैं रहता हूँ जग में 

डरता नहीं मैं किसी भी शै से

आँधी आए तूफ़ाँ डराते नहीं 


आँखों में जिनकी है प्यार देखा

वो ही हैं मेरे, मेरे वो देवा

हाथों में जिनसे शक्ति मिली


बदल जाए दुनिया बदले नहीं 

प्रेम-प्यार उनका बदले नहीं 

मैं पाऊँ जन्नत यहाँ पे यहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 अप्रैल 2023 । सिएटल 

https://youtu.be/Pdg_-Gqou4s







Friday, April 21, 2023

यूएस से लौट के आया हूँ

जब पढ़ लिया मैंने भारत में

भारत में मेरे भारत में 

तब जाकर मैं विदेश आया

कुछ गहने आदि थे बेचे

कुछ लोन जुटा पढ़ने आया

पढ़ने आया और पढ़ मैं खूब गया

पढ़ने में मैं अव्वल आया

पढ़-लिख कर मुझे नौकरी मिली

ख़ुशियों भरा संसार मिला

नौकरी भी ऐसी कि न नौकरी लगी

ऐसी भली और ऐसी हसीं

घर बैठे ही वेतन पाने लगा

काम भी तो था कुछ ख़ास नहीं 

इमेल पढ़ो, इमेल लिखो

दो-चार लोगों से बात करो

स्टेटस दो, स्टेटस लो

बस ऐसे ही दिन भर काम करो


है काम जहां पे ख़ास सदा

मैं हार के वहाँ से आया हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


अच्छे-बुरे का भेद नहीं 

जो चाहा उसे निकाल दिया 

कल तक था जिसको ख़ास कहा 

उसे आज झट से निकाल दिया 

जब काम था मुझसे काम लिया

अब बेकार मैं ख़ुद को पाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


मिलते थे मुझे डॉलर तो क्या

मैं काम भी तो अच्छा करता था

कभी शाम को हो मीटिंग कोई 

हर मीटिंग में शामिल रहता था

ये क्या हुआ, ये क्यों हुआ 

बस सोच के मैं रह जाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


इक बात अभी तक ना समझी

ये एच-आर भी क्या-क्या करता है 

जिसे आज ये फ़ायर करता है 

उसे कल वो हायर करता है 

प्रश्न एक नहीं हैं हज़ार मेरे

और जवाब कहीं से न पाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


दिन दहाड़े बंदूक़ें चलतीं हैं

दिमाग़ ठिकाने न रहते हैं 

कब कौन कहाँ पर बरस पड़े

डर-डर के सब लोग रहते हैं 

घर पर न कोई बुलाता है 

ख़ुद जाऊँ तो गोली खाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


राहुल उपाध्याय । 21 अप्रैल 2023 । सिएटल