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Monday, June 5, 2023

कभी तुम अगर कोई कप तोड़ दो

कभी तुम अगर कोई कप तोड़ दो

अच्छा सा, प्यारा सा कप तोड़ दो

तब सच किसे से न कहना प्रिये

जो टूटा है तुमसे टूटा ही रहेगा

सदा के लिए


अभी तुमको कोई समझ ही नहीं

कि सच बोलना एक अपराध है

अपनों को, औरों को है ख़ुश देखना

तो सच बोलना एक अपराध है

जब सम्बन्ध तुम्हारे बिगड़ने लगे

रिश्तों के पैबंद उखड़ने लगे

तब सच किसे से न कहना प्रिये

जो झूठा है, प्यारा है, प्यारा रहेगा

सदा के लिए 


अभी तुमने दुनिया देखी नहीं 

जब देखोगे दुनिया समझ जाओगे

है दुनिया ये प्यारी, जन्नत सरीखी

झूठ बोलना तुम भी सीख जाओगे 

जब साये तुम्हें डराने लगे

उजाले भी मुँह चुराने लगे 

तब सच किसे से न कहना प्रिये

ये जीवन है संघर्ष, संघर्ष ही रहेगा 

सदा के लिए 


(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 5 जून 2023 । सिएटल 


Monday, May 22, 2023

वक़्त करता जो वफ़ा वोट हमारे होते

वक़्त करता जो वफ़ा वोट हमारे होते

हमने जनता के ये नोट न मारे होते 


अपनी तक़दीर में पहले ही से कुछ तो ग़म है

और कुछ आज की हवाओं में वफ़ा भी कम है

वरना जीती हुई बाज़ी तो न हारे होते


हम भी रोते हैं ये साथी को जता भी न सके

साथ है कोई न किसी को बता भी न सके

काश हम ग़ैरत-ए-महफ़िल के न मारे होते


दम घुटा जाता है सीने में फिर भी ज़िंदा हैं

पंजाब क्या हम तो दिल्ली से ही शर्मिन्दा हैं

मर ही जाते न जो भक्तों के सहारे होते


(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 22 मई 2023 । सिएटल 


Sunday, May 7, 2023

रात को उनसे मुलाक़ात हो गई

रात को उनसे मुलाक़ात हो गई 

जिसे चाहता था मेरे साथ हो गई


हर बार उनसे डर लगता था

हो जाए रूसवा डर लगता था

इस बार उनसे मेरी बात हो गई 


शादी में मिलने के आसार बहुत थे

शादी में बचने के औज़ार बहुत थे

क़िस्मत थी मेरी कि करामात हो गई 


आँखों से उनको निहारा बहुत है

चेहरा वो चेहरा प्यारा बहुत है

कहाँ से वो रजनी मेरी रात हो गई 


राहुल उपाध्याय । 7 मई 2023 । सिएटल 


Friday, April 21, 2023

यूएस से लौट के आया हूँ

जब पढ़ लिया मैंने भारत में

भारत में मेरे भारत में 

तब जाकर मैं विदेश आया

कुछ गहने आदि थे बेचे

कुछ लोन जुटा पढ़ने आया

पढ़ने आया और पढ़ मैं खूब गया

पढ़ने में मैं अव्वल आया

पढ़-लिख कर मुझे नौकरी मिली

ख़ुशियों भरा संसार मिला

नौकरी भी ऐसी कि न नौकरी लगी

ऐसी भली और ऐसी हसीं

घर बैठे ही वेतन पाने लगा

काम भी तो था कुछ ख़ास नहीं 

इमेल पढ़ो, इमेल लिखो

दो-चार लोगों से बात करो

स्टेटस दो, स्टेटस लो

बस ऐसे ही दिन भर काम करो


है काम जहां पे ख़ास सदा

मैं हार के वहाँ से आया हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


अच्छे-बुरे का भेद नहीं 

जो चाहा उसे निकाल दिया 

कल तक था जिसको ख़ास कहा 

उसे आज झट से निकाल दिया 

जब काम था मुझसे काम लिया

अब बेकार मैं ख़ुद को पाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


मिलते थे मुझे डॉलर तो क्या

मैं काम भी तो अच्छा करता था

कभी शाम को हो मीटिंग कोई 

हर मीटिंग में शामिल रहता था

ये क्या हुआ, ये क्यों हुआ 

बस सोच के मैं रह जाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


इक बात अभी तक ना समझी

ये एच-आर भी क्या-क्या करता है 

जिसे आज ये फ़ायर करता है 

उसे कल वो हायर करता है 

प्रश्न एक नहीं हैं हज़ार मेरे

और जवाब कहीं से न पाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


दिन दहाड़े बंदूक़ें चलतीं हैं

दिमाग़ ठिकाने न रहते हैं 

कब कौन कहाँ पर बरस पड़े

डर-डर के सब लोग रहते हैं 

घर पर न कोई बुलाता है 

ख़ुद जाऊँ तो गोली खाता हूँ 

यूएस से लौट के आया हूँ 

यूएस की बात सुनाता हूँ 


राहुल उपाध्याय । 21 अप्रैल 2023 । सिएटल 


Wednesday, May 26, 2021

अब तो है हे प्रभु तुझसे ये विनती

https://youtu.be/WkED0SEnft0 


अब तो है हे प्रभु तुझसे ये विनती

यूँ ही मरना न हो ये मेरी नियति

दुख ही दुख है यहाँ आज चारों तरफ़

यूँ ही मरना न हो ये मेरी नियति


हाँ ये जीवन जो है है तेरा ही दिया

क्यूँ जलने से पहले बुझा है दिया

फूल खिलते मगर हैं डर से भरें

क्या पता कल को वो रहें ना रहें

छीन ले तू न कल बाग से हर कली

यूँ ही मरना न हो ये मेरी नियति


दिन तो ऐसे हुए जो हुए ही नहीं 

रात आई मगर नींद लाई नहीं 

करते-करते दुआ थक गए हाथ हैं

तेरे हाथों में दाता मेरा हाथ है

कर तू सारे करम लाज रख ले मेरी

यूँ ही मरना न हो ये मेरी नियति


राहुल उपाध्याय । 25 मई 2021 । सिएटल 


Monday, May 17, 2021

सत्संग न करें, रोग ने वो काम किया है


सत्संग न करें रोग ने वो काम किया है
उम्र भर के सच का प्रमाण दिया है

है कौन जो आज न जूझा प्रकोप से
दुआओं पे नहीं, दवाओं पे एतबार किया है

तूफ़ाँ से लड़ के भी हम साहिल पे आ गएँ
अपनों ने ही तो हर क़दम पे साथ दिया है 

अपने ही बचाते हैं  संकट के जाल से
है सच, ये आज हर किसी ने मान लिया है 

आओ चलो बढ़े चलें हिम्मत से काम लें
होगा वही जो हम सबने ठान लिया है

राहुल उपाध्याय । 15 मई 2021 । सिएटल

Thursday, January 28, 2021

तुम तोड़ चुके हो मर्यादा

https://youtu.be/9L8NKpLO6SM


तुम तोड़ चुके हो मर्यादा 

सोच पाओ कभी तो रो लेना

इस दिल को तसल्ली क्या दोगे

पछताओ कभी तो रो लेना


एक ख़्वाब सा देखा था हमने

जब वार हुआ वो टूट गया

जिस दिन तुम कुछ अपना खोओ

दुख पाओ कभी तो रो लेना


जीवन के सफ़र में बुराई

पीछा न तुम्हारा छोड़ेगी

संगत का चयन ऐ राह भटके

न कर पाओ कभी तो रो लेना 



(इंदीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 27 जनवरी 2021 । सिएटल 



Saturday, January 9, 2021

झूठ ऐसा इसी ने देखो छोड़ा

यहाँ देखें/सुनें:

https://youtu.be/czbqeMuEoGM


झूठ ऐसा इसी ने देखो छोड़ा

बर्बादी की तरफ ऐसा मोड़ा

कुछ भले मानुष को

अमानुष बना के छोड़ा


पाकर भी इतने वोट ये

यही समझे हुई कोई खोट है

बेईमानी की तरफ़ मुख मोड़ा


कहते है ये दुनिया के बावले 

हुआ यू-एस का बुरा हाल है

जल्दबाज़ी में घोड़ा जैसे छोड़ा


डूबा सूरज फिर से निकला 

रहा नहीं है अंधेरा

देश का सूरज इतना प्रबल

चीरा मेघ घनेरा

कामयाबी से नाता मेरा जोड़ा


(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 9 जनवरी 2021 । सिएटल 

Saturday, November 7, 2020

वरना जीती हुई बाज़ी तो न हारे होते


वोट होते न ख़फ़ा 

आप हमारे होते

और न ग़ैरों की तरह 

आज नकारे होते


आपके चरित्र में पहले ही से न कोई दम है

और कुछ आप की फ़ितरत में वफ़ा भी कम है

वरना जीती हुई बाज़ी तो ना हारे होते


हम पक गए हैं किसी को बता भी न सके

सामने जाम था और जाम उठा भी न सके

काश चारों ओर लगे न ये नारे होते


दम घुटा जाता है सीने में फिर भी ज़िंदा हैं

तुम से क्या हम तो सिस्टम से भी शर्मिन्दा हैं

हट ही जाते जो न वकीलों के सहारे होते


(इंदीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 6 नवम्बर 2020 । सिएटल

 https://youtu.be/DlBce2EKazc 


Tuesday, July 21, 2020

डॉक्टर को देखा

सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें:

http://tinyurl.com/CovidShayari


डॉक्टर को देखा

तूने जब-जब हुआ बुखार

अस्पताल को दौड़ा

तू जब-जब हुआ बीमार 

एक बदनसीब हूँ मैं

मुझे नहीं पूछा एक बार


सूरज की पहली किरणों को

देखा तूने अलसाते हुए

रातों में तारों को देखा

सपनों में खो जाते हुए

यूँ किसी न किसी बहाने

तूने देखा सब संसार


मास्क की क़िस्मत क्या कहिए 

होंठों पे तूने लगाया है

पानी की क़िस्मत क्या कहिए

तूने अंग लगाया है

हसरत ही रही मेरे दिल में

पाऊँ तेरी आँखों में प्यार


(इंदीवर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 20 जुलाई 2020 । सिएटल


Wednesday, April 25, 2018

फेसबुक-वेसबुक

फेसबुक-वेसबुक ऐप्स हैं सारी
ऐप्स की बातों का क्या
कोई किसीका नहीं ये झूठे खाते हैं
खातों का क्या

होगा फ़ोटो सामने तेरे
फिर भी नहीं बूझ पाएगा
लड़का है या लड़की बॉबी
तय नहीं कर पाएगा
रात-रात भर जागने वाले
दिन भर अब तू गाएगा
फेसबुक-वेसबुक ...

उठते-बैठते पिंग करेंगे
ताबड़तोड़ सब 'लाईक' करेंगे
होली-दीवाली और जन्मदिन
सब पर तुझको 'विश' करेंगे
'विश' करते-करते एक दिन
जीवन में विष घोलेंगे
फेसबुक-वेसबुक ...

अपने अब तू कान पकड़ ले
फेसबुक छोड़ कोई काम पकड़ ले
इस-उस ग्रुप में भटक ऐसे
किताब उठा कोई किताब तू पढ़ ले
प्रेम से कह के सबको नमस्ते
राह पे अपनी आगे बढ़ ले
फेसबुक-वेसबुक ...

(इन्दीवर से क्षमायाचना सहित)
25 अप्रैल 2018
सिएटल

Wednesday, October 21, 2009

एच-वन से भरी मेरी सी-वी

एच-वन से भरी मेरी सी-वी
मजबूर करे पीसने के लिए
पागल सा भटकता रहता हूँ
सही दाम पे मैं बिकने के लिए

मिलियन्स बनाउँगा मैं भी कभी
मैं भी अमीर कहलाऊँगा
हर ज़रूरत जब होगी पूरी
तब लौट के घर मैं जाऊँगा
घर बार सभी मैं तजता हूँ
सपनों के पीछे जगने के लिए

निर्धन की तरह मैं रहता हूँ
पाई-पाई मैं गिनता हूँ
फ़्री में कोई कुछ भी बाँटे
मैं हाथ फ़ैलाए फिरता हूँ
आईस-क्रीम का एक स्कूप ही काफ़ी है
घंटों लम्बी लाईन में लगने के लिए

सिएटल 425-898-9325
21 अक्टूबर 2009
(
इंदीवर से क्षमायाचना सहित)
================================
एच-वन = H1; सी-वी = CV = Curriculum Vitae
मिलियन्स = millions; फ़्री = free
आईस-क्रीम = ice-cream; स्कूप = scoop; लाईन = line

Thursday, February 12, 2009

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में
फूल नहीं मेरा दिल है
प्रियतम मेरे मुझको लिखना
क्या ये तुम्हारे काबिल है?

'फ़ूल' मुझे समझा है तुमने
या मिला तुम्हें 'भेजा' कम है?
फूल नहीं आता ई-मेल में
आता सिर्फ़ इक आईकन है

फूल जो असली भेजा होता
दो दिन में मुरझा जाता
आईकन की है बात निराली
हर दिन इसका रूप सुहाता

कंजूसी का काम हो करते
फिर गढ़ते हो झूठी कहानी
ऐसी प्रीत से हासिल क्या है?
कैसे कटेगी ये ज़िंदगानी?

सारी ख़्वाहिशें पूरी करूँगा
हाथ तुम्हारा हाथ में होगा
ओबामा से स्टिमुलस मिलेगा
पे-चैक भी तब हाथ में होगा

आओ मिल कर प्यार करें
और बंद करें आपस की लड़ाई
रिसेशन है तो रिसेशन से निपटें
इसी में है हम सब की भलाई

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में
हाँ, फूल नहीं इक आईकन है
समझ सको तो समझना इसको
इसी को कहते जीवन है

प्यार करेंगे तुमसे तब तक
जब तक सीने में दिल है
पास नहीं है पैसा तो क्या
प्यार का कहीं बनता बिल है?

सिएटल 425-445-0827
12 फ़रवरी 2009
(
इंदीवर से क्षमायाचना सहित)
==================
फूल = flower; फ़ूल = fool; भेजा = 1. sent 2. brain
ई-मेल = e-mail; आईकन = icon; ओबामा = Obama;
स्टिमुलस = stimulus; पे-चैक = pay-cheque; रिसेशन = recession

Thursday, May 1, 2008

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे

(ओबामा अपने धर्मगुरु पर नाराज़ के संदर्भ में धर्मगुरु की ओर से ओबामा को संदेश)

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे
तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना ओबामा
मेरा चर्च खुला है खुला ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब ...

अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं
बहुत सलाहकार मिल जाएंगे
अभी मीडिया के डार्लिंग हो तुम
आर्टिकल जितने चाहोगे लिख जाएंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
वोटर्स भी हाथ से जाने लगे
तब तुम मेरे पास आना ओबामा
मेरा दिल बड़ा है, बड़ा ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब ..
.
कोई तकरार होती नहीं गुरु-शिष्य में
मगर झगड़ा तुमने कर ही लिया
पोल्स में नम्बर जो गिरे ज़रा
नाता जो था तुमने तोड़ ही दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना ओबामा
ये दीपक जला है जला ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब ...

सिएटल,
1 मई 2008
(इंदीवर से क्षमायाचना सहित)
=================
Glossary:
ओबामा = Obama
मीडिया = media

डार्लिंग = darling
आर्टिकल = article
दर्पण = mirror
वोटर्स = voters
पोल्स = polls

Thursday, November 29, 2007

NRI का सफ़र


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

NRI का सफ़र, है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

Dollar को बहुत प्यार हमने किया
रुपयों से भी मुहब्बत निभाएंगे हम
H1 का विसा ले के आये मगर
Citizenship ले के जाएंगे हम
जाएँगे पर किधर, दिल्ली या बैंगलोर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ऐसे NRI भी हैं जो टिके ही नहीं
जिनको greencard से पहले ही pink slip आ गयी
फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
जिनको खिलने से पहले फ़िज़ा खा गई
है परेशां नज़र, थक गये चारागर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
NRI का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

(इंदीवर से क्षमायाचना सहित)