Tuesday, January 30, 2024

हाथ धोते वक्त बाँहें चढ़ाना

हाथ धोते वक्त बाँहें चढ़ाना 

सबको पता है, किसको बताना


सबने सीखा है अपने ही दुख से

सुख ने कभी कुछ किया भला ना


सोच-समझ के बस मंज़िल मिली है

जो बिन सोचे पाई वही बनी फ़साना 


कब कहाँ मैंने किस को बताया 

सब को पता है मेरी जान-ए-जानां


ये दिल मेरा कोई समंदर हो जैसे

जो भी आया उसे अपना ही माना


राहुल उपाध्याय । 30 जनवरी 2024 । सिएटल 







वह कार से जाती

वह कार से जाती 

सुख-सुविधाएँ पाती

ठंड से बचती 

गाने सुन पाती 

ड्राइवर भी होता 

अंगरक्षक सा होता

जैसी जाती 

वैसी आती 

धूल-मिट्टी 

कुछ न पाती


ये सब तो होता 

लेकिन उधार का होता

जी-हजूरी में कहाँ 

सुख मिलता 

स्कूटी उठाके वो 

फ़ौरन निकल गई 

गूँगे को जैसे 

आवाज़ मिल गई 

सुनना छोड़ 

वो गा रही थी 

जानी-अनजानी गलियों से 

जा रही थी

कोई रोकता उसे

तो पता ये चलता

हेलमेट के नीचे

कोई लड़की नहीं है 

नये भविष्य की

एक कोपल खिली है


राहुल उपाध्याय । 30 जनवरी 2024 । सिएटल 


Sunday, January 28, 2024

मर ही जाता जो तुमपे न मरता

मर ही जाता जो तुमपे न मरता

इतना ही है बस तुमसे कहना


वेलेण्टाइन डे कोई उत्सव नहीं है

कैसे बताऊँ कैसे हैं कटता


बहारों की मंज़िल होती नहीं है

इनका है काम आते-जाते रहना


दिन पर दिन वही रूटीन है मेरा

नया-ताज़ा अब कहाँ है दिखता


सोचोगी कभी तो विश्वास करोगी 

मैं उतना बुरा नहीं जितना हूँ लगता 


राहुल उपाध्याय । 28 जनवरी 2024 । सिएटल 

इतवारी पहेली: 2024/01/27


इतवारी पहेली:


तू धुनें अच्छी #%## ## ##

फ़ोटो के लिए ## ## ## ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 4 फ़रवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जनवरी 2024 । सिएटल 



Re: इतवारी पहेली: 2024/01/21



On Sun, Jan 21, 2024 at 2:57 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


जब उग तुम्हारे ## ## #

तब ही हुए तुम ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 28 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2024 । सिएटल 



Friday, January 26, 2024

मेरे बारे मैं लोग बात करते हैं

मेरे बारे में लोग बात करते हैं 

कुछ अच्छा तो कुछ बुरा कहते हैं 


ज़िन्दगी के तजुर्बे हैं कुछ ऐसे

के समझ आने में दिन तो लगते हैं 


मेरी औक़ात क्या, मैं किसे दोष दूँ 

सबमें मेरे ही गुण-दोष दिखते हैं


बन गया जो बनना था, अब और क्या 

जैसे चलते थे वैसे ही दिन अब चलते हैं 


कल क्या होगा किसको पता 

प्यार के नतीजे महीनों में मिलते हैं


राहुल उपाध्याय । 26 जनवरी 2024 । सिएटल 



Thursday, January 25, 2024

प्रेमिका

जो पत्नी पे लिखता था 

उसपे फ़िट हो रही है 

प्रेमिका की चमक

अब खो रही है 


जो जानता ये होगा

मैं छोड़ता न उसको

गीत प्रेम के छोड़ 

ग़ज़ल रो रही है


शहर भर सारा

मुझे जोड़ता है उससे

कैसे कहूँ उनसे

के क़िस्मत सो रही है 


प्रेम-प्यार की बातें 

होती हैं कुछ ऐसी

दो दिन बहलाए

दो दिन धो रही है 


मैं न रहा वैसा 

कि वो प्यार करे मुझसे

बदल गया हूँ मैं 

बदल वो रही है 


राहुल उपाध्याय । 25 जनवरी 2024 । सिएटल 





Sunday, January 21, 2024

यही अमेरिका और भारत में फ़र्क़ है

यही अमेरिका और भारत में फ़र्क़ है

और समझ रहे नहीं कुछ भक्त है

क्या अमेरिका का जनजीवन ठप्प होगा

क्योंकि बन रहा यहाँ चर्च है?


माना कि कुछ ग़लत हुआ था

आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व 

ज़रूर मनाओ ख़ुशियाँ-समारोह 

पर किस बात पे गर्व है?


कि मन्दिर एक बन गया?

कि मूर्ति उसमें बिठा दी गई?

कि प्राण उसमें फूंक दिया?

कि काँच कोई टूट गया?


ज्ञान की किताबें पढ़ कर भी

युवाओं का ये हाल है 

मंगल भवन अमंगल हारी से

गूँज रहा हर हॉल है


क्यूँ कर कोई विकास होगा

जब शहर बन रहे देहात है

गोशालाओ के चक्कर काटती

अफ़सरों की जमात है


राहुल उपाध्याय । 22 जनवरी 2024 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2024/01/21


इतवारी पहेली:


जब उग तुम्हारे ## ## #

तब ही हुए तुम ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 28 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2024 । सिएटल 



Re: इतवारी पहेली: 2024/01/14



On Sat, Jan 13, 2024 at 10:33 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


कमज़ोरी भगाओ, पाओ ## ##

पीने लगो, चाय नहीं, टी #%## 


(#%## <— यह अंग्रेज़ी का शब्द है पर हिन्दी में प्रचलित है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 21 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 14 जनवरी 2024 । स्ट्रेटफर्ड अपॉन एवॉन (इंग्लैंड)



यह देश का नाश है

यह देश का नाश है

जीडीपी का ह्वास है

बैंक सारी बंद हैं

स्कूलों में अवकाश है


ज़बरदस्ती का राज है 

जिनके सर पे ताज है

कर रहे नुक़सान और

आती न उन्हें लाज है


कहीं कोई हड़ताल करे

कहीं कोई करताल बजे

नतीजा बस एक ही 

काम सारे बंद मिले


रामभरोसे देश चला

रामभरोसे चल रहा

सोच विचार कर के

कहाँ आगे बढ़ रहा


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2024 । सिएटल 



Saturday, January 20, 2024

नफ़रत की दुनिया में देख ले

नफ़रत की दुनिया में देख ले

क्या-क्या होता है

बढ़ रहा अहंकार 

अलगाव के बीज बो-बो के

कर रही नित ड्रामे

हज़ारों हज़ार 


बस ख़त्म है भक्ति 

सेवा भाव भी सारे 

बस बिक रहे तेरे

नाम के जयकारे 

देश का विकास नहीं 

कर रही देश का बँटाढार

आज की सरकार 


किस काम के दिये

पेय जल नहीं जो आज

अस्पताल नहीं कोई 

जहां हो रहा इलाज 

रोज़गार-शिक्षा पे नहीं

है कोई ठोस सोच-विचार 

मिटता नहीं अंधकार 


राहुल उपाध्याय । 20 जनवरी 2024 । सिएटल 



Wednesday, January 17, 2024

मौज है आज के लोगों की

मौज है आज के लोगों की

कमी नहीं कुछ मौक़ों की


मरता कोई, हरिद्वार हैं जाते

भूख भी लगती जोरों की


खाते-पीते हलवा-पूड़ी 

नामी-गिरामी हलवाइयों की


फ़ोटो-वोटों ख़ूब हैं खींचती

दाँत दिखाते परिवारों की


कफ़न के पात्र कहाँ ग़लत थे

मिट्टी-पलीद हुई बिचारों की


राहुल उपाध्याय । 17 जनवरी 2024 । सिएटल 




Monday, January 15, 2024

बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद 

उसका फ़ोटो देखा

तो सोचा कुछ अच्छा बोल दूँ 

गुज़र गया होगा

तभी तो किसी ने 

उसे याद किया है


राहुल उपाध्याय । 15 जनवरी 2024 । अम्सटर्डम से बॉस्टन जाते हुए 


Saturday, January 13, 2024

इतवारी पहेली: 2024/01/14


इतवारी पहेली:


कमज़ोरी भगाओ, पाओ ## ##

पीने लगो, चाय नहीं, टी #%## 


(#%## <— यह अंग्रेज़ी का शब्द है पर हिन्दी में प्रचलित है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 21 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 14 जनवरी 2024 । स्ट्रेटफर्ड अपॉन एवॉन (इंग्लैंड)



Re: इतवारी पहेली: 2024/01/07



On Sun, Jan 7, 2024 at 8:04 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


कला के क्षेत्र में है हाथ-## ###

दुनिया में नाम बहुत है ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 14 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 7 जनवरी 2024 । अम्स्टर्डम



हर कोई प्रयास है करता

हर कोई प्रयास है करता

बन जाऊँ सिटिज़न कहीं का

साथ में यह भी कहता

दिल मेरा देश में ही लगता


रोज़ की ये खींचा-तानी

है देसियों की कहानी 


सूटकेस भर-भर ये आए

सूटकेस भर-भर ये जाए

हैं यहाँ तो याद वहाँ की

हैं वहाँ तो याद यहाँ की


त्रिशंकु जैसे डोल रहे हैं 

झूठ-सच सब बोल रहे हैं 


चार जुलाई को पिकनिक मनाते

छब्बीस जनवरी को झण्डा फहराते 

सारे जहां से अच्छा हमारा

देश हिन्दोस्तां हमारा


राहुल उपाध्याय । 13 जनवरी 2024 । एवशाम (इंग्लैंड)


शेक्सपियर

शेक्सपियर,

रोज़ था कविता मैं लिखता

फिर न जाने क्या बात हुई

तू नहीं, तेरी रूह नहीं 

है यहाँ कुछ भी नहीं 

फिर क्यूँ कलम मौन हुई?


राहुल उपाध्याय । 13 जनवरी 2024 । शेक्सपियर की जन्मस्थली 




Monday, January 8, 2024

कोई है जो ढूँढता है

कोई है जो ढूँढता है 

ढूँढता है मुझको चाँद में

चाँद पे न पा के मुझको

खोजता है फ़ोन में 


आस-पास न हूँ मैं उसके

यही तो ख़ास बात है 

चौबीसों घंटे उसको उपलब्ध 

क्या दिन और क्या रात है


आज के हम लैला-मजनू 

मल्टीमीडिया साथ है

फ़ेसबुक और व्हाट्सएप पर

चल रही हमारी बात है 


पाँच मिनट का है मिलन

ख़ास तो जज़्बात हैं

घंटों-घंटों बात करते

सैर करते हम साथ हैं 


वो मुझे इतना है चाहती

कि डीपी पर तस्वीर मेरी और

स्टेटस पर कविता को डाल कर

कर रही मुझको याद है 


वो है मेरी, मैं हूँ उसका

ऐसा कोई वहम नहीं 

वो भी आज़ाद, मैं भी आज़ाद 

हर कोई आज़ाद है


राहुल उपाध्याय । 9 जनवरी 2024 । अम्स्टर्डम