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Friday, August 29, 2008

टिप्पणी लिखोगी तो बात समझ में आ जाएगी

टिप्पणी लिखोगी तो बात समझ में आ जाएगी
लोग अनायास तारीफ़ का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी मेहरबाँ क्यूँ हो
उंगलियाँ उठेंगी भीगे हुए लफ़्ज़ो की तरफ़
शक की निगाह से देखेंगे एक एक हिज्जो की तरफ़
एक एक शब्द के कई अर्थ निकाले जायेंगे
न जाने किस किस तरह के गुमाँ पाले जाएंगे
लोग ज़ालिम हैं हर इक बात का ताना देंगे
बातों बातों में हमारा रिश्ता भी जोड़ जाएंगे
हो सके तो एनानिमस टिप्पणी भी मत लिखना
वरना आई-पी एड्रेस से समझ जाएंगे
चाहे कुछ भी हो बस ई-मेल ही लिखना मुझको
मेरे बारे में कोई बात न करना उनसे
टिप्पणी लिखोगी तो बात समझ में आ जाएगी

सिएटल,
29 अगस्त 2008
(कफ़ील आज़ेर से क्षमायाचना सहित)
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अनायास = all of a sudden
सबब = cause
हिज्जा = spelling of a word
गुमाँ = imagination, fancy, doubt
एनानिमस = anonymous
आई-पी एड्रेस = IP address
ई-मेल = e-mail