Thursday, September 30, 2021

तुम थी

तुम थी

मेरे जीवन में

यह मेरे जीवन की उपलब्धि है 


तुम नहीं हो

इसका मुझे ग़म है


यह ग़म 

मेरी खुशियों को कम नहीं कर सकता

कि तुम थी

मेरी बाहों में

पनाहों में 

मेरा चेहरा था

तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के

सायों में 


दुनिया का कोई ग़म 

इस ख़ुशी को कम नहीं कर सकता 


हर चीज़ 

हर वक्त 

अपने नियंत्रण में हो

क़ाबू में हो

अपने हाथ में हो

यह मोहब्बत नहीं 

तानाशाही है


और यह भी नहीं कि

तुम मुझे अब नहीं चाहती

या किसी और को चाहती हो


बस कठपुतली हो किसी के हाथों में


तुम स्वयं 

अपनी शक्ति का स्रोत हो

तुम्हें स्वयं 

इन अदृश्य सलाख़ों को काटना है

तुम्हें स्वयं

इन अदृश्य ज़ंजीरों को खोलना है


तुम जब चाहोगी तब

तुम जहाँ चाहोगी वहाँ 

मैं मिलूँगा तुमसे

मेरा वादा है तुमसे


बस अपनी शक्ति साथ लाना


राहुल उपाध्याय । 1 अक्टूबर 2021 । रतलाम 


Tuesday, September 28, 2021

है इश्क़ यही

है इश्क़ यही

इसमें दो राय नहीं 


वह इश्क़ नहीं 

जिसमें संघर्ष न हो 

वह प्यार नहीं 

जिसमें दर्द न हो

वह प्रेम नहीं 

जिसका विरोध न हो

वह समाज नहीं 

जो दुश्मन ही न हो


तुम प्रेम करो

और धड़कन न बढ़े 

तुम प्यार करो

और आँसू न बहें 

ऐसे प्यार का

कोई स्वाद नहीं 

ऐसे प्यार की

कोई उम्र नहीं 


तुम प्यार करो

खुलेआम करो

कोई रोक नहीं 

बेलगाम करो

वह इश्क़ नहीं 

सुबह-शाम है वो

आए-जाए कोई 

ध्यान न दे


है इश्क़ वही

जो हमने किया

डर-डर के किया

और दिल से किया


है इश्क़ यही

इसमें दो राय नहीं 


राहुल उपाध्याय । 29 सितम्बर 2021 । सिएटल 




Monday, September 27, 2021

तुम आती हो सामने

तुम आती हो सामने

मन में हज़ारों तूफ़ान लिए

और चेहरे पर कुछ नहीं 

तुम मेरी मोना लिसा हो


तुम आती हो सामने

ब्याहता किसी की

और कविता मेरी

तुम मेरी मीरा हो


तुम आती हो सामने

एक विरहिणी सी

जो खेली मेरे संग

तुम मेरी राधा हो


तुम आती हो सामने


तुम आती हो सामने


तुम आती हो सामने


तुम आती हो सामने


तुम आती हो सामने


तुम आती हो सामने


राहुल उपाध्याय । 28 सितम्बर 2021 । सिएटल 

Sunday, September 26, 2021

बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

कदम अब पीछे लेंगे न हम 


डरते नहीं हम, हो जाए रूसवा 

खो जाए मंज़र, लुट जाए जलवा

कल चाहे हो जाए जहाँ ये ख़तम

(रूसवा = अपमानित)


है जन्नत से प्यारी छोटी ये दुनिया 

इसमें हैं लाखों-लाखों की ख़ुशियाँ 

हमें नहीं है कोई ए-सी का ग़म 


गिर भी पड़ें 'गर होंगे न घायल 

बरसे क़हर या घिर आए बादल 

दिल की लगी ना होगी ये कम


राहुल उपाध्याय । 26 सितम्बर 2021 । पीथमपुर







Saturday, September 25, 2021

इतवारी पहेली: 2021/09/26


इतवारी पहेली:


बेचा कह के ख़ुशबू से भरा पान ### #

जबकि निकला जैसे रखा ज़ुबाँ ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 3 अक्टूबर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 26 सितम्बर 2021 । पीथमपुर  















Friday, September 24, 2021

इतने पास, इतनी दूर

थी इतने पास कि

ख़ुशबू तन-मन में बस गई

थी इतनी दूर कि

होंठ प्यासे रह गए


हाथ इतने पास कि

स्वर्ग ज़मीं पे उतार दूँ 

थाम लूँ, सँवार दूँ

ज़ुल्फ परत-परत निखार दूँ

एक पल में 

उम्र सारी गुज़ार दूँ 


न हाथ हिलें

न होंठ झुकें

नि:शब्द

निष्क्रिय 

निश्चिंत रहें


जो मौन था, विराम था, विश्राम था

सात जनम के साथ का पर्याय था


राहुल उपाध्याय । 25 सितम्बर 2021 । भोपाल 






Thursday, September 23, 2021

इमोजी का गणित

मैं आँखों की भाषा तो दूर 

इमोजी ही नहीं समझ पाता हूँ 

एक साल हो गया

इमोजीकोश भी खंगाल लिये 

ख़ुद के नोट्स भी बना लिए

लेकिन अब भी पहले सा बुद्धू 


एक ही हँसी के दस इमोजी 

😊🤣😃😁😀🙂😄😆😃😀😄😁😆🙂🙃😉😌😗😋😚😙😏🤗

कब कौनसा लगाना है 

कुछ नहीं पता

हर एक में क्या अंतर है

कोई नहीं समझाता


और फिर कौनसा पहले 

कौनसा बाद में है

और कौनसा कितनी बार लगा है

क्या इनमें भी कोई भेद छुपा है?


एक रचना पर यह मिला

👍👏👏

दूसरी पर यह

👍👏🙏

तीसरी पर यह

👌👌👌


क्या आशय समझूँ?

कौनसी ज़्यादा पसन्द आई?

पहली, दूसरी, तीसरी?


राहुल उपाध्याय । 24 सितम्बर 2021 । भोपाल 





सेतु

नदी कम है 

सेतु ज़्यादा 

इधर उधर ही लोग होते हैं 

ऊपर से नीचे

बिरला ही कोई उतर पाता है 


राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2021 । हर की पौड़ी, हरिद्वार 


इतवारी पहेली: 2021/09/19


इतवारी पहेली:


बहुत प्रसिद्ध है चाय ### #

और मैं लगा बैठा हूँ ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 सितम्बर 2021 । सिएटल















Re: इतवारी पहेली: 2021/09/12



रवि, 12 सित॰ 2021 को पू 10:31 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


केले की बात हुई ख़रबूज़े से ###-###

कि घर बना लिया है ## # ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 सितम्बर 2021 । सिएटल















ब्रेकफास्ट

फ़ास्ट कोई करता नहीं 

ब्रेकफास्ट सभी करते हैं 

दया नाम की कोई चीज़ नहीं 

धन दान सभी करते हैं 


हम-आप-सभी-दीवाने 

सुख-चैन से कहाँ रहते हैं 

जो है ही नहीं उसका

पीछा सदा करते हैं 


अच्छा लगता है 

न चैन में संदूक, न संदूक पे ताला

डब्बे का हर यात्री 

अपना सा मुझे लगता है


सम्बन्ध में आईं दरारें

दिखती नहीं चुभती हैं

यादों का भी एक काम हैं

आँख नहीं सूखी रहती हैं 


दाँतों से हँसी, आँखों से आँसू का 

कोई सम्बन्ध नहीं

मुस्कराहट छलकती है शब्दों से

आँसू उमड़ते हैं पन्नों से


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2021 । दिल्ली और भोपाल के बीच 






उल्टा सीधा एक समान #3

उल्टा सीधा एक समान #3

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


आज गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मैं एक नई श्रृंखला की शुरुआत कर रहा हूँ। मैं एक शब्द दूँगा। उससे आपको एक अर्थपूर्ण जुमला बनाना है। जैसे कि यदि नाहक शब्द दिया तो 'नाहक है कहना' जुमला उसका हल है। दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


फ़रहान


राहुल उपाध्याय । 24 सितम्बर 2021 । सिएटल


हलवा-पूड़ी

मैंने उसे हलवा बनाना सिखाया 

अब वह बहुत अच्छा हलवा बनाती है 

मगर किसी एक को खिलाती है

मुझे नहीं 


मैंने उसे पूड़ी बनाना सिखाया 

अब वह बहुत अच्छी पूड़ी बनाती है 

मगर किसी एक को खिलाती है

मुझे नहीं 


मैंने उसे प्यार करना सिखाया 

अब वह बहुत अच्छे से प्यार करती है 

मगर किसी एक को 

मुझे नहीं 


सीखना-सिखाना अच्छी बात है 

यदि ऑफ़लाइन हो

कम से कम सीखते-सिखाते

कुछ चखने को तो मिल जाता है 


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2021 । दिल्ली और भोपाल के बीच 


Sunday, September 19, 2021

इतवारी पहेली: 2021/09/19


इतवारी पहेली:


बहुत प्रसिद्ध है चाय ### #

और मैं लगा बैठा हूँ ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 सितम्बर 2021 । सिएटल















Thursday, September 16, 2021

उल्टा सीधा एक समान #2

उल्टा सीधा एक समान #2

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


आज गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मैं एक नई श्रृंखला की शुरुआत कर रहा हूँ। मैं एक शब्द दूँगा। उससे आपको एक अर्थपूर्ण जुमला बनाना है। जैसे कि यदि नाहक शब्द दिया तो 'नाहक है कहना' जुमला उसका हल है। दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


नदारद 


राहुल उपाध्याय । 17 सितम्बर 2021 । सिएटल



Saturday, September 11, 2021

Re: इतवारी पहेली: 2021/09/05



शनि, 4 सित॰ 2021 को अ 11:20 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


नाचना चाहे # ##

हर इंसान ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 5 सितम्बर 2021 । सिएटल















इतवारी पहेली: 2021/09/12


इतवारी पहेली:


केले की बात हुई ख़रबूज़े से ###-###

कि घर बना लिया है ## # ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 सितम्बर 2021 । सिएटल















ये दुनिया हसीं थी, ये दुनिया हसीं है

https://youtu.be/sjTFjiBrRNg


ये दुनिया हसीं थी

ये दुनिया हसीं है

जिस दिन से समझा

बहुत दिलनशीं है 


समाँ जो भी था

वो अब भी यहीं है

दिल देनेवाले 

अब भी यहीं है

मिट के भी मिटता

कुछ भी नहीं है 


जो भी चाहे सुन लो

दिल के फ़साने

धड़कन वही हैं

वही हैं तराने

मोहब्बत की रंगत

वही की वही है


अपना लो सबको

घबराना छोड़ो

न ठुकराओ आँचल 

न राहें ही मोड़ो

ज़माना है जैसा

बहुत ही सही है 


राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2021 । सिएटल