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Wednesday, January 6, 2021

डी-सी में जलन, सदन में तूफ़ान सा क्यों है

यहाँ सुनें/देखें:

डी-सी में जलन, सदन में तूफ़ान सा क्यों है
व्हाइट हाउस में बैठा हैवान सा क्यों है

वोट है तो गिनने का मौका भी तो दीजे 
अनपढ़ की तरह ये अनजान सा क्यों है

गरमाई की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो
तोड़फोड़ पे आमादा संतान सा क्यों है

क्या कोई नहीं बात समझ आती है इस को
हुई हार तो आज ये हैरान सा क्यों है

(शहरयार से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 6 जनवरी 2021 । सिएटल

Monday, December 21, 2020

ये क्या जगह है दोस्तो

ये क्या जगह है दोस्तो

ये कौन सा दयार है

कि कैमरे के सामने 

हो रहा उपचार है


ये किस मकाम पर हयात

मुझको लेके आ गई

न मर्ज़ी ख़ुद की है जहाँ

न कोई अधिकार है


तमाम उम्र तो हिसाब 

माँगता है लखपति

बन गया वो दानवीर 

जो मेरा गुनहगार है


बुला रहे हैं सब मुझे 

चिलमनों के उस तरफ़

बहला-फुसला के हो रहा 

मुझपे अत्याचार है


न जिसकी शकल है कोई

न जिसका नाम है कोई

आज उसे मिटाने की 

इनपे धुन सवार है


(शहरयार से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 21 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

Monday, November 2, 2020

इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है


चुनाव है तो चुनने का बहाना कोई ढूँढे

पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है


भेड़ चाल की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो

ता-हद्द-ए-नज़र एक उफ़ान सा क्यूँ है


क्या कोई नई बात नज़र आती है फल में 

जो बोया वही पाया हैरान सा क्यूँ है


(शहरयार से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 2 नवम्बर 2020 । सिएटल


रफ़ीक = दोस्त

https://youtu.be/XwtzYGxSWl0