Wednesday, January 6, 2021
डी-सी में जलन, सदन में तूफ़ान सा क्यों है
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:48 PM
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Monday, December 21, 2020
ये क्या जगह है दोस्तो
ये क्या जगह है दोस्तो
ये कौन सा दयार है
कि कैमरे के सामने
हो रहा उपचार है
ये किस मकाम पर हयात
मुझको लेके आ गई
न मर्ज़ी ख़ुद की है जहाँ
न कोई अधिकार है
तमाम उम्र तो हिसाब
माँगता है लखपति
बन गया वो दानवीर
जो मेरा गुनहगार है
बुला रहे हैं सब मुझे
चिलमनों के उस तरफ़
बहला-फुसला के हो रहा
मुझपे अत्याचार है
न जिसकी शकल है कोई
न जिसका नाम है कोई
आज उसे मिटाने की
इनपे धुन सवार है
(शहरयार से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 21 दिसम्बर 2020 । सिएटल
Monday, November 2, 2020
इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है
सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है
इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है
चुनाव है तो चुनने का बहाना कोई ढूँढे
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है
भेड़ चाल की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो
ता-हद्द-ए-नज़र एक उफ़ान सा क्यूँ है
क्या कोई नई बात नज़र आती है फल में
जो बोया वही पाया हैरान सा क्यूँ है
(शहरयार से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 2 नवम्बर 2020 । सिएटल
रफ़ीक = दोस्त
https://youtu.be/XwtzYGxSWl0
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:06 AM
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