चिंगारी कोई भड़के तो जनमानस मज़ा उठाए
अप्रिय घटना न घटे तो कैसे कोई फोन चलाए
जनतंत्र जो आग बुझाए, जो सबका ख़्याल रखे
उसे हर कोई चाहे, उसे हर कोई जिताए
माना युवा के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
लोगों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का
भाड़े पर जो लोगों को जोड़े उसे कौन जताए
कि हंगामा ही करना है तो हमें बख़्श दो हाए
हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का
वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का
जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए
जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए
न जाने क्या हो जाता, जाने वो क्या कर जाते
बंदोबस्त था तो बच गए वरना कितने मर जाते
सोचो तो व्यवस्था के दम पे घर कितने बचाए
‘गर विरोध है करना तो राष्ट्रपति को आप बताए
(आनंद बख़्शी से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल

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