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Saturday, December 6, 2008

लगता नहीं है दिल मेरा

लगता नहीं है दिल मेरा
आज के हिन्दुस्तान में
किसमें है हौसला
जो ठहरे जंग के मैदान में

कह दो नौजवानों से
कहीं और जा बसें
बचा ही क्या है भला
इस जलते श्मशान में

बमुश्किल बचा पाए थे
हम फ़कत चार उसूल
दो बेरोज़गारी में खर्च हो गए
दो दंगा-ए-हिंदू-मुसलमान में

कहने को है लोकतंत्र मगर
लोकतंत्र का स्वाँग है
जनता और नेता दोनो ही
बोलते नहीं एक जबान है

है कितना बदनसीब
ये भारत देश 'राहुल'
कि दुश्मन भी मिले
तो मिले अपनी ही संतान में

सिएटल,
6 दिसम्बर 2008
(ज़फ़र से क्षमायाचना सहित)

Thursday, March 13, 2008

Blogger ज़फ़र

न किसी के blog पर linked हूँ
न किसी की list में favorite हूँ
जो किसी का ध्यान न पा सके
मैं ऐसी chain-mail unread हूँ

न कोई मुझको ping करे
न कोई मुझ से chat करे
दूर दूर मुझ से सब रहे
जैसे मैं virus की threat हूँ

मेरा domain भी मुझसे छीन गया
मेरे ads पर किसी ने न click किया
जो Nigeria से रोज आती है
मैं वो property unclaimed हूँ

कोई blog पढ़ने आए क्यूँ?
कोई comments लिख के जाए क्यूँ?
जो कभी internet से न connect हो
मैं वो एक computer sad हूँ

मेरी emails सारी unread हैं
मेरी posts सारी ignored हैं
जो पैदा होते ही मर गया
मैं ऐसा email thread हूँ

सिएटल,
13 मार्च 2008
(बहादुर शाह ज़फ़र से क्षमा याचना सहित)
[Please, कम से कम आप तो comment देते जाओ! अल्लाह के नाम पर दे दे! भगवान तुम्हे खुश रखे! तुम्हारा DSL connection कभी न टूटे!]

Friday, February 15, 2008

शेयर बज़ार में ज़फ़र


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

फलता नहीं है धन मेरा डूबे हुए बज़ार में
किसका पोर्टफ़ोलिओ बचा है इस उतार में

कह दो आयकर वालों से कहीं और करे कर वसूल
मेरे घर का तो खर्च चलता है उधार में
फलता नहीं है ...

पेट काट काट के खरीदे थे चार कम्पनीयों के शेयर
दो टी-वी पर डाउनग्रेड हो गए दो अखबार में
फलता नहीं है …

कितना है बदनसीब राहुल कि खरीदे हुए
साठ के शेयर बिकते हैं तीन-चार में
फलता नहीं है …

(बहादुर शाह ज़फ़र से क्षमायाचना सहित)