Saturday, September 30, 2023

इतवारी पहेली: 2023/10/1


इतवारी पहेली:


पहुँचते ही पश्चिम #%## #

ख़ुशी से गड्ढे गए ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 8 अक्टूबर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 1 अक्टूबर 2023 । सिंगापुर 




Friday, September 29, 2023

है समन्दर कहीं तो कहीं सहरा है मेरा

है समन्दर कहीं तो कहीं सहरा है मेरा

तू जो नहीं तो हर जलजला है मेरा

(जलजला = क्रोधी, बिगड़ैल 

ज़लज़ला = भूकम्प

सहरा = रेगिस्तान)


तेरे बग़ैर कहाँ मौत भी मयस्सर 

मर-मर के जीवन चलता है मेरा


हैं आँखों में तेरी विवशता के साएँ

इनसे ही तो पेट भरता है मेरा


जब से सुना तू चाहती है मुझको

ख़तरों से दिल न डरता है मेरा


रू-ब-रू नहीं, ख़यालों में हूँ 

साँसों में तेरी अक्स रहता है मेरा


राहुल उपाध्याय । 30 सितम्बर 2023 । सिंगापुर 






Thursday, September 28, 2023

तुमसे मिले मानो ज़माना हुआ

तुमसे मिले मानो ज़माना हुआ 

जीवन घट के जैसे आधा हुआ 


चमन में, शहर में मिलते हैं फूल 

पर तुमसा न कोई हमारा हुआ


तुम न होते तो हम भी न होते 

एक तुम से ही जीवन गवारा हुआ 


ये घूमना-फिरना सब फ़िज़ूल है जानम

जब हाथ में न हाथ तुम्हारा हुआ 


मिलेंगे कभी ये उम्मीद है बाक़ी 

इतना भी ख़ुदगर्ज़ न ख़ुदाया हुआ 


राहुल उपाध्याय । 29 सितम्बर 2023 । सिंगापुर 







न सोए, न जागे, न तड़पे हैं हम

न सोए, न जागे, न तड़पे हैं हम

आधी रात को न करवट बदले हैं हम


रहे दूर सदा शोख़ चिंगारियों से हम

किसी के भी ग़म में न झुलसे हैं हम


कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है वो मेरा

कह-कह के न पागल सा भटके हैं हम


उन्मुक्त गगन के पंछी हैं हम

दामन से लिपट के न रोए हैं हम


ये दुनिया है फ़ानी, ये दुनिया है जानी

सम्बन्धों से भी कस के न चिपके हैं हम


राहुल उपाध्याय । 29 सितम्बर 2023 । सिंगापुर 






Wednesday, September 27, 2023

दुष्ट काली घटाएँ

दुष्ट काली घटाएँ 

मुझे परेशान करती हैं 

अच्छी-भली लड़की के

सोए अरमान जगाया करती हैं 


बैठी हूँ खिड़की पर

सब कुछ देखते हुए भी न देखते हुए 

खो जाती हूँ 

कच्ची उम्र में

बच्चों के झुण्ड में 

किशोरावस्था के युग में

साइकल पर

तो कभी पैदल

कभी कॉलेज 

तो कभी स्कूल 

आज़ाद थी

आज़ाद हूँ 

पर ख़ुद की ही उधेड़बुन में 

ख़ुद को पाती क़ैद हूँ 


दिन-दिवस-सुबह-दोपहर-शाम-सहर-रात-निशा

हज़ारों नाम हैं इस जेल के 

धड़कनों की घुटन है

साँसों के इस जाल में


दुष्ट काली घटाओं 

क्या रिश्ता है मेरा तुमसे 

क्यूँ चली आती हो

मुझे मेरी विवशता जताने

मुझे मेरे सपने दिखाने

मुझे फिर से मारने

मुझे फिर से जिलाने 


बूँदें बरसे

तो कुछ राहत मिले


राहुल उपाध्याय । 27 सितम्बर 2023 । अमेरिका से सिंगापुर की 16 घंटे की फ़्लाइट में 









Monday, September 25, 2023

देवदास

मैं कभी देवदास नहीं बन सकता

बहुत जल्दी दिल जुड़ जाता है 

कोई पसन्द आने लग जाता है 

मैं उसका और वो मेरी लगने लगती है 

उठते-बैठते उसी का ख़याल आता है 

कविताओं में उतरने लगती है 

फ़िज़ाओं में घुल जाती है 

फ़ोन लॉग में उसका वर्चस्व हो जाता है

सेल्फ़ी से अल्बम भर जाती है 

बातें इतनी होती हैं कि 

सुबह-शाम से काम नहीं चलता

वक्त-बेवक्त बात हो जाती है 


जो कहते हैं 

मैं तनहा हूँ 

उन्हें क्या पता

मैं कितना अलहदा हूँ 


राहुल उपाध्याय । 25 सितम्बर 2023 । सिएटल 

Saturday, September 23, 2023

Re: इतवारी पहेली: 2023/09/17



On Sat, Sep 16, 2023 at 10:45 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


मैंने घर महल # ##

अब जल रही हैं ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 24 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 17 सितम्बर 2023 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2023/09/24


इतवारी पहेली:


कैसे खींच पाती शॉपिंग #%# ###

हिल-डुल रहे थे जो किसी #%## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 अक्टूबर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 24 सितम्बर 2023 । सिएटल 




Friday, September 22, 2023

गुलाब

तुम हो गुलाब तो हम ख़ार नहीं हैं

तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के तलबगार नहीं हैं


जीते हैं शौक़ से, मरते हैं शोख़ पर

किसी शरत के पियक्कड़ किरदार नहीं हैं 


लड़ के भी तुमने कहाँ छोड़ा है हमको

हम तुम जैसे भीखमंगे और मक्कार नहीं हैं


सब करते हैं जग में अपने ही मन की

कोई किसी का यहाँ गुनहगार नहीं है 


तुम जीयो, मरो या पा जाओ पुरस्कार कोई 

हमें रत्ती भर भी तुमसे कोई सरोकार नहीं है 


राहुल उपाध्याय । 22 सितम्बर 2023 । सिएटल 



Wednesday, September 20, 2023

वजह

तुम्हारा फोन आया

तो ऐसा लगा

जैसे 

सिएटल में धूप खिली है 

खाना बना रखा है 

विविध भारती पर अच्छा गीत बज रहा है 

भूख लगी है 

और मैं एक-एक कौर

एक-एक निवाला 

हज़ारों 

रंगों से

ख़ुश्बूओं से

कृतज्ञताओं से

चैतन्यताओं से

सराबोर हो कर खा रहा हूँ 


जब तुम नहीं थी

तब भी

रंग थे

ख़ुश्बूएँ थीं

कृतज्ञताएँ थीं 

चैतन्यताएँ थीं

पर उनकी कोई वजह नहीं थी


वजह न हो

तो सब अजीब लगता है 


वजह मिल जाए

तो ख़ुशी होती है 

कि इसमें मेरा भी कुछ योगदान है


ख़ैरात किसे अच्छी लगती है?


राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2023 । सिएटल 


Saturday, September 16, 2023

इतवारी पहेली: 2023/09/17


इतवारी पहेली:


मैंने घर महल # ##

अब जल रही हैं ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 24 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 17 सितम्बर 2023 । सिएटल 




Re: इतवारी पहेली: 2023/9/10



On Sun, Sep 10, 2023 at 2:47 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


हम ना कबीर हैं, # ## #

ज़िन्दगी हमारे लिए ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 10 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2023 । सिएटल 




Sunday, September 10, 2023

नज़रों में सबकी

नज़रों में सबकी

जादू है ऐसा

जिसको जो चाहे 

दिखता है वैसा


लड़ते-झगड़ते हैं

संत भी देखो

चीज़ ही ऐसी है

रूपया-ओ-पैसा


महलों में थी तो

बच गई मीरा

गाँव में होती

अंत होता वो कैसा


अहिल्या को तारे

पत्नी को त्यागे

ऐसा-वैसा 

ये धर्म है कैसा


हम थे अलग

तभी तो मिले थे

अब तुमको चाहिए 

अपने जैसा


राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2023 । सिएटल 



इतवारी पहेली: 2023/9/10


इतवारी पहेली:


हम ना कबीर हैं, # ## #

ज़िन्दगी हमारे लिए ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 10 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2023 । सिएटल 




Re: इतवारी पहेली: 2023/09/03



On Sat, Sep 2, 2023 at 4:00 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


मेरा उनतालीस यूँ आया और यूँ #### गया

उनका तो उनतीस के बाद ## ## गया


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 10 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 3 सितम्बर 2023 । कोज़ूमेल, मैक्सिको 





Saturday, September 9, 2023

न रदीफ है, न क़ाफ़िया

न रदीफ है, न क़ाफ़िया 

पढ़ के भी क्या किया 


रात थी कि मात थी 

भीग गया तकिया


कौन सी ये क़ौम है

बूझ रही है बिटिया 


न रोष है, न रोशनी

मिट रही है दुनिया 


धुल गए पाप सभी 

जी न सकी नदिया


खीर चढ़ी भोग में

ताक रही है बछिया 


राहुल उपाध्याय । 9 सितम्बर 2023 । सिएटल 


न जलता तो क्या होता

न जलता तो क्या होता

मोम से मैं भरा होता


मर-मिटना ही जीवन है

मुझको कब पता होता


जानता जो सच्चाई को

रस्मों से जुदा होता


होता न मासूम मैं

पर्दों में छुपा होता 


होश-ओ-हवास होते यदि

कहीं न मैं गया होता


सर पर बोझ कहाँ मेरे

होता तो क्या खड़ा होता


जानता कि जीवन समर है

कभी न मैं बड़ा होता


राहुल उपाध्याय । 9 सितम्बर 2023 । सिएटल 




Friday, September 8, 2023

भारत था, भारत है, भारत रहेगा

ये देश हमारा कमज़ोर नहीं, ताक़त बनेगा 

भारत था, भारत है, भारत  रहेगा 


एक पात्र नहीं, एक नस्ल नहीं, हिम्मत बनेगा 

भारत था, भारत है, भारत  रहेगा 


पंजाब नहीं, गुजरात नहीं, एक राष्ट्र बनेगा 

भारत था, भारत है, भारत  रहेगा 


हर प्रांत से, हर जात से, ऊपर उठेगा 

भारत था, भारत है, भारत  रहेगा 


भारत तो शाश्वत है, शाश्वत रहेगा 

भारत था, भारत है, भारत  रहेगा 


राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2023 । सिएटल