Showing posts with label Bharat Vyas. Show all posts
Showing posts with label Bharat Vyas. Show all posts

Monday, May 8, 2023

स्नूज़ पे स्नूज़ दबाते रहो

स्नूज़ पे स्नूज़ दबाते रहो

देर तक चादर ताने रहो


आँख में आए जो नींद कभी

उसको गले से लगाते रहो


अपना क़िस्सा दुख का सागर

सबको सुखी हो बताते रहो


जाए मौसम, जाए बला से

ऐ-सी के गुण गाते रहो


आए मोड़ पे ठेले जितने

सबका धंधा चलाते रहो 


राह में आए जो दुख कभी

चैन की बंसी बजाते रहो


राहुल उपाध्याय । 8 मई 2023 । सिएटल 


Thursday, March 11, 2021

ऐ बन्दे तुझे क्या है ग़म


https://youtu.be/A4rEoF3EOqU


ऐ बन्दे तुझे क्या है ग़म 

तेरे सर पे है उसका करम

बात बन जाएगी

राह मिल जाएगी

'गर तू पाले न कोई भरम 


एक ही का सदा नाम ले

खुद ही खुद को थाम ले

तू वही पाएगा 

जो भी कर जाएगा 

तेरी बुद्धि से खुद काम ले

कर दिल से 

न रख कुछ वहम 

जो भी पाएगा

होगा अहम


कोई पाया नहीं पार है

मिला सुंदर ये संसार है

मिला सूरज हमें

मिला चंदा हमें 

सब सुखों की मिली खान है

भरी दौलत यहाँ है अगम 

पग-पग पे है उसका करम


(भरत व्यास से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 11 मार्च 2021 । सिएटल 

Tuesday, June 30, 2020

ऐप पे ऐप चलाते चलो


सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें:

https://tinyurl.com/RahulParodies


ऐप पे ऐप चलाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
जहाँ से भी पाओ जो कुछ भी कभी
सबको गले से लगाते चलो

जिसका न कोई धंधा-पानी 
उसी ने आग लगाई
जो लोकल है, जो वोकल है, 
उसी ने मुँह की खाई 
ग़रीबों को न गरीब बनाते चलो

आशा टूटी, ममता रूठी 
छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार योग का 
विश्व कुटुंब है हमारा
दीप योग का जलाते चलो

छाया है चहुँ और अंधेरा 
भटक गई हैं दिशाएँ
मानव बन बैठा है दानव 
किसको व्यथा सुनाएँ
धरती को स्वर्ग बनाते चलो

(भरत व्यास से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 30 जून 2020 । सिएटल

Wednesday, March 12, 2008

आ लौट के आजा NRI

आ लौट के आजा NRI
तुझे रुपये बचाने हैं
तेरी net worth रही है गिर
तुझे रुपये बचाने हैं

दिल्ली नही
हैदराबाद ही सही
कही तो डेरा जमा ले
Wipro नही
Infosys ही सही
कही तो पैसा कमा ले
ये घड़ी न आए फिर
तुझे रुपये बचाने हैं
आ लौट के आजा NRI

एक हाथ से dollar
एक हाथ से रुपया

दोनो हाथों से धन ही बटोरा
आज इस देश में
कल उस देश में
हर जगह है भीख का कटोरा
तेरी इज़्ज़त न जाए गिर
तुझे रुपये बचाने हैं
आ लौट के आजा NRI

सिएटल,
12 मार्च 2008
(भरत व्यास से क्षमा याचना सहित)

Friday, November 30, 2007

ऐ दौलत तेरे बंदे हम


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

ऐ दौलत तेरे बंदे हम
ऐसे है हमारे करम
अपनो से जुदा
चाटे बाँस का जूता
ताकि 'मिलियन' तो हो कम से कम

जब 'ले-आँफ़' का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
कोई बुराई करें
हम बड़ाई करें
तूझको ही ईश्वर जानना
बढ़ चले 'केसिनो' को कदम
हर तरह के करें खोटे करम
अपनो से जुदा ...

ये डाँलर गिरा जा रहा
और एन-आर-आई घबरा रहा
हो रहा बेखबर
कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छिपा जा रहा
है किस 'करेंसी' में वो दम
जो अमावस को कर दे पूनम
अपनो से जुदा ...

बड़ा गरीब है एन-आर-आई
चाहे लाखों में कर ले कमाई
सर झुकाए खड़ा
हाथ फ़ैलाए खड़ा
पेट काट काट के जोड़े पाई-पाई
दिया तूने जो 'मिलियन' सनम
नहीं होगी भूख इसकी खतम
अपनो से जुदा ...

(भरत व्यास से क्षमायाचना सहित)