जाने वो कैसे लोग थे
जिनका ए-आई से काम बना
हमने तो जब करने को बोला
"नहीं कर सकता" ये कहा
इसको ही जीना कहते हैं
तो यूं ही जी लेंगे
सच ना कहेंगे
कूल-ऐड पी लेंगे
झूठ से अब घबराना कैसा?
झूठ सौ बार सुना
बिगड़ गया मेरा सारा बजट
टोकन ले-ले के
कोई तो हो जो मेरी सुन ले
और कुछ काम करे
फेबल-शेबल कुछ काम ना आए
ऐजेंट निष्प्राण पड़ा
जैसे-जैसे दिन बढ़ जाए
मेरी आस घटे
कभी कुछ कह दे
कभी कुछ सुन ले
सत्यानाश करे
इस रोग का कोई अंत नहीं है
रोग बेजोड़ बड़ा
राहुल उपाध्याय । 2 सितंबर 2026 । सिएटल
