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Sunday, November 1, 2020

तेरा मेरा काम रहे

तेरा मेरा काम रहे 

ट्रम्प हो, बाईडेन हो, 

कोई भी नाम रहे


सर्दी की शाम हो या, 

जून का सवेरा हो

सब गवारा है मुझे, 

काम बस मेरा हो

अच्छा हो पक्का हो, 

मिलता सही दाम रहे


कोई वादा ना करें, 

कभी खाए न क़सम,

जब कहें बस ये कहें, 

हार के झगड़ेंगे न हम

सब के होंठों पे, 

ख़ुशियों का जाम रहे


बीच हम दोनों के, 

कोई दीवार न हो

हम दोनों में से

कोई बेकार न हो

प्यार की प्रीत की 

यूँ ही सुबह-ओ-शाम रहे


(रवीन्द्र जैन से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 30 अक्टूबर 2020 । सिएटल 


https://youtu.be/84dkL4EcTHg 


Monday, September 21, 2020

फ़ेसबुक की तरह

फ़ेसबुक की तरह

हँसता ही रहा हूँ मैं 

कभी इस 'पोज़' में 

कभी उस 'पोज़' में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


मैं देता रहा

ख़ुशख़बरियाँ कई

मेरी बात मेरे

मन ही में रही

यूँही घुट-घुट के

यूँही झूठमूठ में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


कैसे जुड़ गया

कैसे जोड़ा गया

किस-किससे मुझे

फिर जोड़ा गया

कभी इस गुट में 

कभी उस गुट में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


अपनों की सुनूँ 

या कि ग़ैरों की

हर तरफ़ है फ़ौज 

बे-सर-पैरों की

कभी इस तर्क पे

कभी उस तर्क पे

हँसता ही रहा हूँ मैं 


(रवीन्द्र जैन से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 23 जून 2017 । सिएटल

 https://youtu.be/xsR8jn9_Vqk 


Friday, December 23, 2016

क्रिसमस ट्री की तरह कटता ही रहा हूँ मैं

क्रिसमस ट्री की तरह 
कटता ही रहा हूँ मैं
कभी इस ट्रक पे, कभी उस ट्रक पे
लदता ही रहा हूँ मैं

मैं तकता रहा 
प्रेज़ेंट्स औरों के लिए
कोई लाया नहीं 
कुछ मेरे लिए
यूँही सज-धज के
मीत सब तज के
तकता ही रहा हूँ मैं

हॉल में सजूँ
या कि कमरे में
कटे हुए की जगह
तो है कचरे में 
बिन आरनामेंट्स
बिन लाईट्स के
ठिठुरता ही रहा हूँ मैं

आज ख़रीदा गया
कल फेंका गया
जलती आग पे भी
मुझे सेंका गया
यूँही बिक-बिक के
यूँही सिक-सिक के
मिटता ही रहा हूँ मैं

(रवीन्द्र जैन से क्षमायाचना सहित)
23 दिसम्बर 2016
सिएटल | 425-445-0827
tinyurl.com/rahulpoems 


Tuesday, February 22, 2011

आप से पहले

इस रचना का श्रेय विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा और राजा को जाता है.

आप से पहले
आप से ज्यादा
गधा आज तक नहीं मिला
इतना क्लू-लेस
इतना घोंचू
बंदा आज तक नहीं मिला

इसको स्पीच कहे या कागज़ का टुकड़ा
जो किसी और ने पढ़ा था
इनको अनपढ़ कहे या पढ़े-लिखे अनपढ़
जिनको रिज़र्वेशन मिला था
इन्हीं लोगों को हम चुन रहे हैं
एक भी ढंग का आज तक नहीं मिला


इनको मंत्री कहे या रिश्वत के बोरे
जिनके मुँह हमेशा खुले हैं
जब चाहे तब ये देखो
नष्ट करने में देश को तुले हैं
इन गुंडों को पीट के रख दे
ऐसा डंडा आज तक नहीं मिला

सिएटल
22 फ़रवरी 2011
(रवीन्द्र जैन से क्षमायाचना सहित)