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Tuesday, April 25, 2023

जगन्नाथ कहते हैं जिनको सभी

जगन्नाथ कहते हैं जिनको सभी

प्रलय चाहे आ जाए बचाए वही


डर के नहीं मैं रहता हूँ जग में 

डरता नहीं मैं किसी भी शै से

आँधी आए तूफ़ाँ डराते नहीं 


आँखों में जिनकी है प्यार देखा

वो ही हैं मेरे, मेरे वो देवा

हाथों में जिनसे शक्ति मिली


बदल जाए दुनिया बदले नहीं 

प्रेम-प्यार उनका बदले नहीं 

मैं पाऊँ जन्नत यहाँ पे यहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 अप्रैल 2023 । सिएटल 

https://youtu.be/Pdg_-Gqou4s







Thursday, May 20, 2021

ज़िन्दगी की दवा पा गए


https://youtu.be/eTI-ADPXVDk 


ख़तरों से घिर के भी हम

ज़िन्दगी की दवा पा गए

हमने सोचा नहीं था कभी

पा गए, पा गए, पा गए


हम थे ऐसे भँवर में फँसे

जिसकी कोई भी मंजिल न थी

हम थे दिन के अंधेरों में गुम

रात तो राख से काली थी

कोई राह जब मिली न हमें

जाने क्या-क्या ख़याल आ गए


सोचो हम कितने मज़बूर थे

करने वाले भला कर गए

पीछे मुड़ के जो देखा ज़रा

रंग वे नायाब से भर गए

क़ुर्बां खुद वे हुए तो हुए

दान जीवन का बरसा गए


राहुल उपाध्याय । 20 मई 2021 । सिएटल 

Wednesday, May 19, 2021

रोग से उबर जाना है

https://youtu.be/zUPJpkFFwpE


एक दिन मास्क तो हटाना है

रोग से उबर जाना है

हमें बस दिल से दिल लगाना है

रोग से उबर जाना है


ऐसी ज़िन्दगी होगी,

हर तरफ़ खुशी होगी

इतना प्यार होगा तब

ऐ मेरे सनम


तब न कोई ग़म होगा

न ये प्यार कम होगा

साथी मेरे मुझको तेरे

सर की है क़सम

सच में ये वक़्त भी आना है

रोग से उबर जाना है


मैं अकेला क्या करता

ऐसे ही आँहे भरता

तेरे प्यार के लिये

तड़पता उम्र भर


जाने क्या मैं कर जाता

यूँ तड़प के मर जाता

बिन तेरे भला कैसे

गुज़रा ये सफ़र

तेरे लिये बच के भी दिखाना है

रोग से उबर जाना है


तेरा चाँद सा मुखड़ा

तू जिगर का है टुकड़ा

तू है मेरी सपनों की

झील का कंवल


जान से तू है प्यारा,

आँखों का है तू तारा

बिन तेरे जियें नहीं

जी के भी ये पल

सब कुछ मिल के ये बताना है

रोग से उबर जाना है


(समीर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 15 मई 2021 । सिएटल 

Thursday, May 13, 2021

तू मेरी वैक्सीन है

https://youtu.be/V1EDhNEULbw


तू मेरी वैक्सीन है

तू मेरी हर खुशी है


तू ही मास्क  

तू ही डॉक्टर

तू ही औषधि है


लम्बी उमर का अरमान है तू

पढ़ के भी घुस न पाए, वो ज्ञान है तू

तू ही मेरी पहली ख़्वाईश

तू ही आखिरी है


हर साँस तन की मेरी तुझको दुआ दे

खुशियां तुझे ग़म सारे मुझको खुदा दे

तुझको भुला ना पाया

मेरी बेबसी है


राहुल उपाध्याय । 12 मई 2021 । सिएटल 

Sunday, February 14, 2021

आशा ही आशा के गीत वो गाता है

https://youtu.be/F8Iwji_GG_0


ग़म लाख आए

दिन-रात आए

मन को मेरे पर 

डरा न पाए


अब तो मेरा मन

रोज़ ही गाता है 

आशा ही आशा के 

गीत वो गाता है


न जाने कैसा एहसास है

साँस ही है जो बस ख़ास है

क्या नशा इस बात का

मुझपे सनम छाने लगा

कोई न जाने क्या हो जाता है

आशा ही आशा के गीत वो गाता है


क्या ख़ूब है ये मेरा यक़ीन 

मुझको है बस मुझपे यक़ीन 

परेशानियों से 

दिल दूर-दूर जाने लगा

तनहाई में भी अब ख़ुश हो जाता है

आशा ही आशा के गीत वो गाता है


(समीर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 14 फ़रवरी 2021 । सिएटल