Sunday, July 26, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/26

इतवारी पहेली:


दाल-चावल के लिए चाहिए दो ### 

दाल पका पत्नी ले, चावल पका ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 2 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 26 जुलाई 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/07/19

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On Sun, Jul 19, 2026 at 12:09 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


सौ सूखी हैं, # ## हैं

लड़ रहा बस ### है


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 जुलाई 2026 । सिएटल 


Saturday, July 25, 2026

दिल तो न था

दिल तो न था पर जाना पड़ा 

ख़ामियाज़ा किसी को उठाना पड़ा


जर्जर है महल शायद बदलेगा कल फ़िलहाल तो जालों को हटाना पड़ा


ये तिनका था पीठ पे किसी ऊँट के 

बढ़ गया बोझ तो बिठाना पड़ा


बरसों से दुनिया में बदला ही क्या है ग़रीबों को जान से जाना पड़ा


लीक से हटकर कभी कुछ किया ही नहीं बार-बार अनशन को आज़माना पड़ा


राहुल उपाध्याय । 25 जुलाई 2026 । सिएटल 






Friday, July 24, 2026

घोंसला

घोंसला एक आज फिर से टूटा


नीड़ का निर्माण फिर से होगा


चलो किसी का पिंजरा तो छूटा 


छत और दीवारें

बहुत ज़रूरी हैं 


यह ज़रूरी तो नहीं कि 

वह एक जेल हो


जहाँ 

उड़ने की

जुड़ने की

बढ़ने की

आज़ादी न हो


राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल 



कहाँ जा रहा था

कहाँ जा रहा था 

कहाँ आ गया 

गुलज़ार और प्रदीप को छोड़ 

नारेबाज़ी पा गया


ये कौन सा तरीक़ा है 

ये कौन सा मज़ाक है 

सुन्दर-सुन्दर रील के बदले 

कोहराम क्यों छा गया

 

क्या इसीलिए मैं विदेश आया था

इसलिए आई-फोन लिया था 

कि एक दिन पलट के देखूँ 

कौन से शहर में 

कौन क़हर ढा रहा


ये अलगोरिदम क्यों फ़ेल हुए 

ये सीन क्यों लीक हुए

मुझे मेरे पहाड़ों के 

उछलती नदियों के 

दूध से श्वेत झरनों के 

सीन चाहिए 


कहाँ जा रहा था 

कहाँ आ गया


राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल 


Sunday, July 19, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/19

इतवारी पहेली:


सौ सूखी हैं, # ## हैं

लड़ रहा बस ### है


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 जुलाई 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/07/12

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On Sat, Jul 11, 2026 at 10:43 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


राधा ने गाँव में गोबर से दीवार # ## 

और देखते रह गए राम, श्याम, ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 जुलाई 2026 । सिएटल 


Wednesday, July 15, 2026

पी-एम ही तो हैं

पी-एम ही तो हैं

न मसीहा कोई 

व्रत किसी इंसान का

जा के तोड़ आए क्यूँ 


वांगचुक मियाँ के बग़ैर 

कौन से काम बंद हैं

रोइए ज़ार ज़ार क्या 

कीजिए हाए हाए क्यूँ


जिनका यश है चारों ओर

नभ में जयजयकार है

सड़क पे लेटे आदमी पे

ध्यान उनका जाए क्यूँ 


जग में आएंगे और कई 

एंकर, वाचक और कवि

सबकी अपनी दुकान है

जात से अपनी जाए क्यूँ 


जबसे खुली ये आँख है 

देखे हैं विरोध अनगिनत 

हमने न कोई विरोध किया 

हाथ ये हम जलाए क्यूँ 


राहुल उपाध्याय । 15 जुलाई 2026 । सिएटल 





Tuesday, July 14, 2026

माचिस की डिबिया से बंद

माचिस की डिबिया में बंद 

आग 

सुरक्षित है

काम की है


दाल-रोटी भी पका देती है


जब चाहो

जला लो

घर रोशन भी हो सकता है 

एक नया चिराग़ भी पैदा हो सकता है 


खुला छोड़ दो तो 

आग 

सब राख कर देती है


राहुल उपाध्याय । 14 जुलाई 2026 । सिएटल 


Monday, July 13, 2026

पढ़ लिख के

पढ़ लिख के 

हमने किया क्या है? 

कभी खुद को 

तो कभी सबको गधा कहा है


जो जानते हैं 

वे दुखी हैं

जो अनजान है

खुश ही दिखा है


आते-जाते मौसमों में 

एक बारिश ही है 

जिसकी ज़रूरत 

हर कोई समझता है


ये दुनिया की समझदारी 

हमें न रास आई

कभी शांति का 

तो कभी युद्ध का दिया मशवरा है


क्या है ये दुनिया, 

क्या है ये जीवन

सोचा जो कभी 

तो बिगड़ा खुद का हाजमा है


राहुल उपाध्याय । 13 जुलाई 2026 । सिएटल 





Saturday, July 11, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/12

इतवारी पहेली:


राधा ने गाँव में गोबर से दीवार # ## 

और देखते रह गए राम, श्याम, ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 जुलाई 2026 । सिएटल 


Thursday, July 9, 2026

करूँ भला

करूँ भला तो निमित्त हूँ केवल

हो जाए गुनाह तो दोष है मेरा 


वो बच गया भीषण स्ट्रोक से एक दिन

ईश्वर दयालु है, उसने बचा लिया 


तड़प के मर गई बच्ची अस्पताल में

सारा क़सूर दरिंदों का ही है 


बनाया मंदिर, राम आ गए

पर किसी काम के नहीं 

सीसीटीवी न हो तो 

चोर हाथ ही न आए


दिन-रात खड़े 

न जाने क्या देखते हैं 

नाक की सीध में 

कुछ हो तो देख भी ले

इधर-उधर भला वो कहाँ देखते हैं 


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 




मैं न होता

मैं न होता तो खुदा भी न होता

भला भी न होता, बुरा भी न होता


अपने हाथों से बहुत कुछ लिखा है मैंने

प्रेस न होती तो कुछ लिखा भी न होता


आए दिन यहाँ होते झगड़े बहुत हैं 

अकल न होती तो कोई लड़ा भी न होता


दंड देने को हम सब कबसे तैयार बैठे हैं

देते नसीहत तो लफड़ा खड़ा भी न होता


अपनों को कब तक हम बचाते फिरेंगे

हम होते हरिश्चंद्र बाल बाँका भी ना होता


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 











Sunday, July 5, 2026

Re: इतवारी पहेलीः 2026/06/28

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On Sun, Jun 28, 2026 at 4:11 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को

जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल