Thursday, July 9, 2026

मैं न होता

मैं न होता तो खुदा भी न होता

भला भी न होता, बुरा भी न होता


अपने हाथों से बहुत कुछ लिखा है मैंने

प्रेस न होती तो कुछ लिखा भी न होता


आए दिन यहाँ होते झगड़े बहुत हैं 

अकल न होती तो कोई लड़ा भी न होता


दंड देने को हम सब कबसे तैयार बैठे हैं

देते नसीहत तो लफड़ा खड़ा भी न होता


अपनों को कब तक हम बचाते फिरेंगे

हम होते हरिश्चंद्र बाल बाँका भी ना होता


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 











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