मैं न होता तो खुदा भी न होता
भला भी न होता, बुरा भी न होता
अपने हाथों से बहुत कुछ लिखा है मैंने
प्रेस न होती तो कुछ लिखा भी न होता
आए दिन यहाँ होते झगड़े बहुत हैं
अकल न होती तो कोई लड़ा भी न होता
दंड देने को हम सब कबसे तैयार बैठे हैं
देते नसीहत तो लफड़ा खड़ा भी न होता
अपनों को कब तक हम बचाते फिरेंगे
हम होते हरिश्चंद्र बाल बाँका भी ना होता
राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल

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