ख़ामोश है ज़माना, चुप-चाप हैं सितारे
आराम से है मोदी, बेकल है दिल के मारे
ऐसे में कोई ओबामा, इस तरह से आ रहा है
जैसे कि पधार रहे हैं, ईश्वर कोई हमारे
टीवी चैनल वाले चीखें साँझ और सकारे
आएगा, आएगा, आएगा, आएगा आनेवाला, आएगा आनेवाला
अमरीका का चमचा भारत कैसे फुदक रहा है
कोई नहीं बताता पर गो-माँस पक रहा है
पनपेगा कैसे भारत बे-रीढ़ सर झुका के
बरसों पहले हमने गांधी सा नेता पाया
जिसने सादा जीवन जीना हमें सीखाया
अब कहाँ हैं वो लोग जो आँख से आँख मिलाए
भटकी हुई जवानी, मँज़िल को ढूँढती है
माझी बग़ैर नय्या, साहिल को ढूँढती है
चल देते हैं सब के सब इंग्लैंड-अमरीका के द्वारे
