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Monday, June 12, 2023

कम-कम हों ग़म-वम

कम-कम हों ग़म-वम

सरस-सरल बन जाएँ हम

खिले प्यार इस जीवन में

करें हम वो करम


यही एक गम है

दिल को जो तोड़े

अपना ये सारा

दम-ख़म निचोड़े 

आओ करें ग़म ख़तम


अपने नहीं हैं

ग़म-वम हैं जो भी

इनकी जलाएँ 

हर रोज़ होली

जैसे-तैसे हों भसम 


राहुल-अनीता । 11 जून 2023 । सिएटल-शंघाई


Thursday, April 20, 2023

पल-पल चले गन-वन

पल-पल चले गन-वन सुलग-सुलग जाए मन

लगे आज इस दुनिया में नहीं है अमन 


मसला हो कोई मारना किसी को

हल तो नहीं है मारना किसी को

हाय करे अब क्या जतन


जब रेडियो पे चलती हैं ख़बरें 

कोई मर रहा है फिर आज गन से

बूँद-बूँद बरसे नयन 


(योगेश से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 20 अप्रैल 2023 । सिएटल 

Monday, November 28, 2011

कहीं दूर जब पासपोर्ट बन जाए

कहीं दूर जब पासपोर्ट बन जाए
जल्दी से उसमें वीसा लगाए
दूर-दराज के देश में जा के
कोई सपनों के दीप जलाए

कहीं तो ये दिल कभी जुड़ नहीं पाते
कहीं से निकल आए जन्मों के नाते
भली सी लड़की से ब्याह रचा के
ग्रीन-कार्ड की प्यास बुझाए
कहीं दूर जब...

कभी यूँहीं जब हुई ले-ऑफ़ की बातें
भर आई बैठे-बैठे बस यूँहीं आँखें
कहाँ पे आ के, फ़ंसे हम हाए
अधेड़ उम्र कुछ समझ न पाए
कहीं दूर जब...

कभी तो ये दिल कहे, चलो घर जाए
फिर कहे, अभी रूके, अभी और कमाए
कमा-कमा के बरस हैं गुज़रे
जाने की फिर भी न टिकट कटाए
कहीं दूर जब...

(योगेश से क्षमायाचना सहित)