ग़ालिब हुआ और यह भाव ग़ालिब हुआ
कि कुछ भी न वाजिब हुआ
कोई इधर गया, कोई उधर गया
कोई भी न मेरी जानिब हुआ
न मिलता है वो, न करता सलाम
जब से वो शख़्स साहिब हुआ
हुई ज़िंदगी पूरी तरह से तबाह
जब से है कोड वाइब हुआ
जब से हुए हैं नरेन्दर मोदी हमारे
खाना बिना ब्राइब हुआ
राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2026 । सिएटल

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