Thursday, August 27, 2026

मँझधार

जिसे सोचता हूँ कि बेकार है

उसी से लेकिन मुझे प्यार है


वो करती है बातें बड़े ज्ञान की

उसे ज्ञान से न लेकिन सरोकार है


अकेला हूँ मैं, अकेली है वो

दोनों को दोनों की न दरकार है


हम हैं अलग तो ये बोलचाल है

हुए साथ तो बस तकरार है


ऐ धरती, ऐ अंबर कुछ तो बता

है किनारा कहीं कि बस मँझधार है


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल 


इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें