Monday, April 18, 2022

इश्क़ हुआ आज मुकम्मल मेरा

इश्क़ हुआ आज मुकम्मल मेरा

रो रहा हूँ भीगो आँचल मेरा


ग़ैर भी हो गए अपने इतने

साथ नहीं देते आजकल मेरा


इधर आग तो उधर पानी है

हैं कहाँ वो जो बने सम्बल मेरा


इल्म हो 'गर कहाँ मक़ाम उसका

आना-जाना न हो मुसल्सल मेरा


जब-जब हाथ जलें मेरे

और बढ़ा मनोबल मेरा


राहुल उपाध्याय । 18 अप्रैल 2022 । सिएटल


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