मिट्टी अच्छी होती है
धूल ख़राब
मम्मी अच्छी होती है
मम्मी जी ख़राब
पापा अच्छे होते हैं
पापा जी ख़राब
राहुल उपाध्याय । 9 फ़रवरी 2026 । दिल्ली
मिट्टी अच्छी होती है
धूल ख़राब
मम्मी अच्छी होती है
मम्मी जी ख़राब
पापा अच्छे होते हैं
पापा जी ख़राब
राहुल उपाध्याय । 9 फ़रवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
ना डैडी कूल हैं, # # ## हैं
और दोनों बेटे #### हैं
(पहली पंक्ति का तीसरा शब्द अंग्रेज़ी का है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 15 फ़रवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 8 फ़रवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
बन गई चुड़ैल, वो जादुई ## ## में
मैं राजकुमार असफल रहा #### में
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 8 फ़रवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 1 फ़रवरी 2026 । दिल्ली
वह जानती है कि
मुझे डायबिटीज़ है
मैं अनाज नहीं खाता हूँ
इसलिए सिर्फ़ लौकी-भिंडी जैसी
सब्जियां ही बनाती है, परोसती है,
खिलाती है
कोई रोटी-पूड़ी-पराठा नहीं
लेकिन आदतन
घर में प्रवेश करते ही
एक ट्रे में स्टील के ग्लास में पानी
और एक छोटी तश्तरी में
कुछ मीठा ले आती है
किसी रिश्तेदार का फोन आया
जिससे सम्बन्ध अच्छे नहीं है
पटती नहीं है
लेकिन फोन उठाते ही
हैलो नहीं कहती
प्रणाम कहती है
संस्कार का क्या किया जाए
शब्द-कृत्य अर्थहीन हो जाते हैं
राहुल उपाध्याय । 6 फ़रवरी 2026 । उज्जैन
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:52 PM
आपका क्या कहना है??
1 पाठक ने टिप्पणी देने के लिए यहां क्लिक किया है। आप भी टिप्पणी दें।
इतवारी पहेली:
बन गई चुड़ैल, वो जादुई ## ## में
मैं राजकुमार असफल रहा #### में
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 8 फ़रवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 1 फ़रवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
तारीख़ पड़ी बारह, ##ह# #
नाव न मिली तो आया ## #%#
(बारह को बोलते वक़्त कई बार बारा बोल देते हैं। ह छूट जाता है। इसी तरह से पहली पंक्ति का ह बोलते वक़्त ग़ायब हो जाता है। इसलिए दूसरी पंक्ति के शब्दों से ग़ायब है।
दूसरी पंक्ति का दूसरा शब्द किसी का निक नेम है। जैसे कि अक्षय का अक्की।)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 फ़रवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 25 जनवरी 2026 । दिल्ली
चढ़ते सूरज को सबने प्रणाम किया
चाँद उतरा आँगन तो प्यार किया
जो चढ़ गया
सर चढ़ गया
सर झुका गया
जो उतर गया
दिल में उतर गया
राहुल उपाध्याय । 26 जनवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
तारीख़ पड़ी बारह, ##ह# #
नाव न मिली तो आया ## #%#
(बारह को बोलते वक़्त कई बार बारा बोल देते हैं। ह छूट जाता है। इसी तरह से पहली पंक्ति का ह बोलते वक़्त ग़ायब हो जाता है। इसलिए दूसरी पंक्ति के शब्दों से ग़ायब है।
दूसरी पंक्ति का दूसरा शब्द किसी का निक नेम है। जैसे कि अक्षय का अक्की।)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 फ़रवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 25 जनवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
न जाने किसका फ़ादर या ## ## है
लेकिन उसमें तनिक भी न #^## है
(पहली पंक्ति का पहला शब्द अंग्रेज़ी का है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 25 जनवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 18 जनवरी 2026 । दिल्ली
हर तरह से ज़िंदगी है बस मेरी ज़िंदगी
इसको पाने को कभी न कोई फ़ीस भरी
न मिली कहीं से, न दी किसी ने
नैसर्गिक है जैसे बहती नदी
ये होती कहाँ है, ये उगती कहाँ है
बनाती नहीं इसे मशीन कोई
ये ख़्वाब, ये हसरतें, ये जज़्बात मेरे
इनके ही ईंधन से सदा ये फली
आती है, जाती है, स्वयं ज़िंदगी
इसके आगे कभी न मेरी चली
दे दूँ किसी को मन बहुत हुआ
पर हाथ में न आए ये उलझन बड़ी
राहुल उपाध्याय । 22 जनवरी 2026 । दिल्ली
पता नहीं
क्या पहनती थीं
सेंडल
चप्पल
या जूतियाँ
सूट
टॉप
या साड़ियाँ
पता नहीं
कैसे बाँधती थीं बाल
लगाती थी लिपस्टिक
या पहनती थीं बालियाँ
पता नहीं
कैसी दिखती थी वो
(देखने को तो देख लूँ
हज़ारों सेल्फियां
बचा के रखी हैं
जो गूगल पे मैंने
दिखा देगा मुझको
एक-एक पिक्सल वो उसके
और उगा देगा
काँटों का बगीचा
यादों का सैलाब
कहाँ की गलती
कहाँ थे ग़लत)
याद है लेकिन
उसकी मुस्कान
रूठना उसका
और टप-टप
बहते वो आँसू
पता नहीं कैसी
होगी वो आज
क्या लड़ रही होगी
आज भी उखड़ी प्रथाओं से
क्या जूझ भी रही होगी
कुछ अपनी व्यथाओं से
क्या प्यार होगा उसे
आज भी उससे
जिसकी बाँहों में उसे
प्यार मिला था
जीवन जीने का
आधार मिला था
परित्यक्त थी
मैंने राह दिखाई
जीवन जीने की
ज्योत जगाई
आई थी मेरे जीवन में धम से
छू के मुझे
मुझको बदलने
छू के चल दी
उन्मुक्त गगन में
याद है गीत मुझे
पहले मिलन का
क्या यही प्यार है?
राहुल उपाध्याय । 20 जनवरी 2026 । दिल्ली
बड़ी से बड़ी मूर्तियां
खड़ी हैं चारों ओर
युवकों को रोज़गार नहीं
भगदड़ का है शोर
भगदड़ का है शोर
कालिख में नहाए जनता
पर्यावरण को रख ताक पर
बन रहा है पईसा
बन रहा है पईसा
मिलावट जोरदार
खा-खा के आदमी को
हो गए रोग चार
हो गए रोग चार
जिनका नहीं उपचार
अस्पताल के नाम पर
बस मंदिर हैं तैयार
राहुल उपाध्याय । 19 जनवरी 2026 । सिएटल
अब हम बिना निमंत्रण
किसी के यहाँ नहीं जाते हैं
और वे भी
एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने से
बाज नहीं आते हैं
अब उनमें फ़ोटो और वीडियो
जो शेयर किए जाते हैं
उन्हें लाइक करना
लाज़मी हो जाता है
बाद में
लिखित में
मेजबान को
थैंक्यू बोलना
अनिवार्य हो जाता है
क्योंकि मुँह पर बोलने में
वो मज़ा नहीं
जो बाद में सार्वजनिक
रूप से दिया जाता है
थोड़ा-बहुत
चैटजीपीटी का भी
इस्तेमाल हो जाए
तो चार चाँद लग जाते हैं
हम
औपचारिक बनकर
कितने गर्व से भर जाते हैं
राहुल उपाध्याय । 18 जनवरी 2026 । दिल्ली
इतवारी पहेली:
न जाने किसका फ़ादर या ## ## है
लेकिन उसमें तनिक भी न #^## है
(पहली पंक्ति का पहला शब्द अंग्रेज़ी का है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 25 जनवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 18 जनवरी 2026 । दिल्ली
कभी वो किसी के साथ होती है
कभी मैं किसी के साथ
हम चाहते हुए भी एक-दूसरे से
बात नहीं कर पाते हैं
यही सोचकर ख़ुश हो जाते हैं
कि हम कितनी क़िस्मत वाले हैं
कि किन-किन हालातों से गुज़र के
हम छुप-छुप के नैन लड़ाते हैं
राहुल उपाध्याय । 17 जनवरी 2026 । पुष्कर