Thursday, March 19, 2026

बसंत

बसंत पे कविता मैं लिखता नहीं 

बसंत मेरे गमले में खिलता नहीं 


मेरी अपनी राह है मंज़िल मेरी

जहाँ भीड़ हो वहाँ मैं जुड़ता नहीं 


लिखने दो घिसा-पिटा जो लिखा करे

ऐसी रचनाओं को क़तई मैं पढ़ता नहीं 


चरागों को रोशनी देना ही है

चरागों की प्रशंसा मैं करता नहीं 


राहुल का अर्थ कुछ भी होता रहे

सच है कि मैं सब जैसा करता नहीं 


राहुल उपाध्याय । 19 मार्च 2026 । सिएटल 



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