बेशक मुझको गले न लगाओ
ना कोई नफ़रत, ना कोई प्यार हो
दोस्त के जैसे ही हाथ बढ़ाओ
तुमको जो कहना है मुझसे ही कहना
ख़्वाब में आके मुझे तंग न करना
घर पर, दर पर कभी तो आओ
चलते-चलते 'गर मिल जाओ
नैन चुरा के न आगे बढ़ जाओ
देखो मुझको, थोड़ा मुस्काओ
दोस्ती-यारी, इक जिम्मेवारी
चलती नहीं है बीच नर और नारी
तर्क-वितर्क सब फिर से बताओ
राहुल उपाध्याय । 23 मार्च 2026 । सिएटल

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