हसीनाओं से बच के कहाँ हम जिएँगे
उन्हीं से जिएँगे, उन्हीं पे मरेंगे
ये बात और है कि वो बेवफ़ा हैं
बेगैरत हैं हम तो, उम्मीद तो रखेंगे
कहते हैं हमसे कि हम ना मिलेंगे
मिल के भी हम तो मर ही मिटेंगे
ये जुदाई नहीं है, यही तो मिलन है
ताउम्र तुमको ख्वाबों में तकेंगे
तुम्हीं से है जन्नत, तुम्हीं से ख़ुदाई
तुम्हें ही नाखुदा और खुदा हम कहेंगे
राहुल उपाध्याय । 19 मार्च 2026 । सिएटल

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