Wednesday, March 18, 2026

पढ़-लिख के डिग्री भले साध ली

पढ़-लिख के डिग्री भले साध ली 

जवानी मगर मैंने बर्बाद की 


न आँखों से बोला, न मुँह से कहा 

कोई होता तो होती कोई बात भी 


तन्हा सा रहता था सहरा में मैं 

क्या जाने कैसी घड़ी साथ थी 


न जी भर के रोया, न टूटा ये दिल

किस्मत ने कैसी ये सौग़ात दी


मैं जैसा था वैसे का वैसा रहा

आज भी हैं नियम मेरे सारथी


राहुल उपाध्याय । 18 मार्च 2026 । सिएटल 

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