Monday, March 16, 2026

सिलेंडर

ये कैसा है मंजर 

के ग़ायब सिलेंडर 


सब कुछ है बाहर 

कुछ भी न अंदर

कब से खड़े हैं 

आया न नम्बर


बस चुनाव जीतो 

यही एक मंतर 

जनता का क्या

वह चुनती निरंतर


जीना था हमें 

अपने ही दम पर

जी रहे हैं आज

कर के सरेंडर


विश्व गुरु का टैग 

लगाना ना हम पर

ए-आई ने कर दिया 

हमें डम्ब और डम्बर


पाओगे ऑफ़र 

बम्पर पे बम्पर 

बन जाओ 'गर 

तुम एक प्लम्बर


आए न तूफ़ान 

उठे न बवंडर 

इसलिए नाम 

होता न रेंडर


आर्टिस्ट हूँ तो 

रहता हूँ सहमकर 

हो न जाए कहीं 

हमला ही जमकर


न राम बचाए 

न बचाए शंकर 

समस्या बड़ी 

विकट और भयंकर


कहाँ है गांधी 

कहाँ अम्बेडकर 

जिन्हें मानते थे हम 

देश के एंकर 


राहुल उपाध्याय । 16 मार्च 2026 । सिएटल 

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