दवाईयों का असर इतना है
कि जब तक पिता गुज़रते हैं
आँसू सुख चुके होते हैं
माँ के जाने की
हम घड़ियाँ गिनते हैं
दुख क्या है
हम जानते नहीं
समझ नहीं पाते
बचपन में कोई
अप्रिय घटना
घटती नहीं है
जवानी घर से दूर
दादा-दादी, नाना नानी को
जाना है तो चले जाते हैं
युद्ध में
लाखो लोग मरते हैं
तो मरते होंगे
तेल जरूर महँगा हो गया है
पर बस में जाने की
नौबत अभी आई नहीं है
राहुल उपाध्याय । 27 मार्च 2026 । सिएटल

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