Thursday, March 19, 2026

हसीनाओं से बच के

हसीनाओं से बच के कहाँ हम जिएँगे 

उन्हीं से जिएँगे, उन्हीं पे मरेंगे 


ये बात और है कि वो बेवफ़ा हैं

बेगैरत हैं हम तो, उम्मीद तो रखेंगे


कहते हैं हमसे कि हम ना मिलेंगे 

मिल के भी हम तो मर ही मिटेंगे


ये जुदाई नहीं है, यही तो मिलन है 

ताउम्र तुमको ख्वाबों में तकेंगे


तुम्हीं से है जन्नत, तुम्हीं से ख़ुदाई 

तुम्हें ही नाखुदा और खुदा हम कहेंगे


राहुल उपाध्याय । 19 मार्च 2026 । सिएटल 


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2 comments:

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 22 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

सुशील कुमार जोशी said...

वाह