Friday, April 27, 2018

अँगूठे

हम सब एक हैं

कोई भी धर्म हो

देश हो

जात हो

उम्र हो

लिंग हो

सबके सब

स्मार्टफ़ोन में 

मुँह छुपाए

रहे आँखें सेंक हैं


लेकिन मेरी मम्मी और मामी जैसे भी अनेक हैं

जिनमें अभी भी विवेक है

या यूँ  कहिए कि ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं

इसलिए अँगूठे दिए नहीं टेक हैं 


27 अप्रैल 2018

सिएटल


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