Thursday, October 29, 2020

तेरी बातों के सिवा

तेरी बातों के सिवा चुनाव में रखा क्या है


तू बके सुबह-सुबह, तू बके शाम ढले

तेरा बकना मेरा पकना यूँही प्रचार चले


क़समों की रस्मों में वादे हज़ारों हैं लिखे हुए

हैं मेरे ख्वाबों के क्या-क्या नगर इनमें ढहते हुए


इनमें मेरे आनेवाले ज़माने की तस्वीर है

सियासत की कालिख से लिखी हुई मेरी तक़दीर है


(मजरूह से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 28 अक्टूबर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/y_0Me1vyMnI 

--

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


0 comments: