आरक्षण की इन ख़बरों में
लूटमार की इन तस्वीरों में
खोजता हूँ मैं कौन सा ख़ून
दौड़ रहा है इन वीरों में
आरक्षण है या आवंटन?
क़ाबिलियत पे है लांछन
सरकारी संस्थानों का हो शोषण
क्या यही है आरक्षण?
कन्याकुमारी से कश्मीर तक
फैला हुआ है कुशासन
हर क़ौम का, हर जात का
हो रहा है रोज़ विभाजन
न रक्षा है, न सुरक्षा है
सिर्फ़ मोदीजी का भाषण है
क्षण-क्षण छन-छन छन-छन के
तज रही हैं हमें प्रतिभाएँ
और हम है कि पूज रहे हैं
बना-बना के विशालकाय प्रतिमाएँ
कहीं आगज़नी, कहीं लूटमार
कहीं इंक़लाब का नारा है
और 56 इंच की छाती के अलावा
और नहीं कोई सूझता हमें चारा है
राम भरोसे चलता भारत
राम-राज्य का सपना है
लोकतंत्र के युग में यारो
यह एक भयानक सपना है
जहाँ कोई लोक-लाज नहीं
कोई चुनाव प्रयास नहीं
बस एक नारी की मर्ज़ी पर
किसी एक राजकुमार को जग सह लेता है
26 अगस्त 2015
सिएटल । 425-445-0827
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