शादी है एक ऐसा अजूबा
जो अच्छे-खासे को एक दिन
बना दे नमूना
बना दे
टाईगर को बिल्ली
और
बीवी को टाईगर
जो देता था फूल
वो लगता है 'फ़ूल'
दुनिया के आगे
कर के भूल कबूल
मानो प्राईमरी का बच्चा
लिखे ब्लैकबोर्ड पे दस बार
माफ़ करे मिस!
मैं करूँगा होमवर्क हर बार
सिएटल । 425-445-0827
24 फ़रवरी 2010
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'फ़ूल'= fool; प्राईमरी = primary;
ब्लैकबोर्ड = blackboard; मिस = miss;
होमवर्क = homework
Wednesday, February 24, 2010
शादी है एक ऐसा अजूबा
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:38 AM
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Labels: news, relationship
Sunday, February 21, 2010
सोचता था
सोचता था
तुम मिलोगी
तो ऐसा होगा
तुम मिलोगी
तो वैसा होगा
घंटों हम बातें करेंगे
एक-दूसरे को निहारा करेंगे
चुप न रहेंगे
खूब हँसेंगें
एक-दूसरे की टांग खींचेंगें
लेकिन तुम
आई-फोन में घुसी रही
और मैं
ब्लैकबेरी से चिपका रहा
दिन ढला
और रात हुई
दिल से दिल की
न बात हुई
तुम चली
और मैं चला
खत्म हमारी मुलाक़ात हुई
सोचता था
तुम मिलोगी
तो ...
सिएटल । 425-445-0827
21 फ़रवरी 2010
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आई-फोन = iPhone; ब्लैकबेरी = blackberry
Posted by Rahul Upadhyaya at 3:45 PM
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Labels: intense, relationship, valentine
Sunday, February 14, 2010
कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की
कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की
बहुत खूबसूरत मगर सांवली सी
चलो चेक करूँ ई-मेल आती ही होगी
कह कह के लॉगिन करती तो होगी
कोई कॉल शायद मिस हो गया हो
सेल फोन बार बार देखती तो होगी
और फिर फोन की घंटी बजते ही वो
उसी फोन से डर डर जाती तो होगी
चलो पिंग करूँ जी में आता तो होगा
मगर उंगलियां कँप-कँपाती तो होंगी
माऊस हाथ से छूट जाता तो होगा
उमंगें माऊस फिर उठाती तो होंगी
मेरे नाम खास ईमोटिकॉन सोचकर
वो दांतों में उँगली दबाती तो होगी
चलो सर्च करुँ जी में आता तो होगा
कभी याहू तो कभी गुगल पर
मेरा नाम बदल बदल कर
मुझे बार बार ढूंढती तो होगी
मेरे ब्लॉग पर ख़ुद को कविता में पाकर
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
लिखूँ टिप्पणी जी में आता तो होगा
कीबोर्ड पे उंगली थरथराती तो होगी
कई बार मन की उमंगो को लिख कर
वो ’कैन्सल’ बटन फ़िर दबाती तो होगी
सिएटल
(कमाल अमरोही से क्षमायाचना सहित)
(अंतिम अंतरे के लिये मैं अनूप जी का आभारी हूँ.)
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चेक = check; ई-मेल = email; लॉगिन = login
कॉल = call; मिस = miss; सेल फोन = cell phone
पिंग = ping; माऊस = mouse; ईमोटिकॉन = emoticon
सर्च = search; याहू = Yahoo; गुगल = Google
ब्लॉग = blog; कीबोर्ड = keyboard; कैन्सल’ = cancel
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:03 AM
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Labels: valentine
Thursday, February 11, 2010
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
जब हो टोयोटा की कंडम कार
और ओबामा की ठप्प सरकार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
सोच समझ के ली थी कार
और ओबामा को पहनाया हार
उसका नतीजा निकला ये
कि दे दी दोनों ने मुझको हार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
चलना है जिसको वो चलती नहीं
रूकना है जिसको वो रूकती नहीं
टोयोटा-ओबामा में मैं ऐसा फ़ंसा
कि डूब गया मेरा घर-संसार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
हमने इसको राज दिया
इसने हमको त्याग दिया
खुद है शहंशाह, पाए ईनाम
और रहे हम बेकाम बेकार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
करता धरता कुछ भी नहीं
देश के हित की सुध भी नहीं
'चेंज' और 'होप' के नारे लगाए
और जब देखो तब कहे जी-ओ-पी मक्कार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
जब जब आए संकट बड़े
माइक लिये ये दिखाए पड़े
वक्ता है, नहीं नेता है
मझधार में नाव की जो खेते पतवार
राम ही जाने कैसे बेड़ा होगा पार
सिएटल । 425-445-0827
11 फ़रवरी 2010
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'चेंज' = change
'होप' = hope
जी-ओ-पी = GOP = Grand Old Party = Republican Party
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:45 AM
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Saturday, January 30, 2010
त्रासदी
जब खटखटाते थे द्वार
कहते थे घर जाइए आप
अब मरते हैं आज
तो पूछते हो
कैसे हैं आप?
हैटी की जनता की
यदि इतनी थी चिंता
तो करते मदद
जब थे वो ज़िंदा
जब कमा के खाने के लिए
आते थे वो
तरह-तरह के दाँव-पेंच निकाल के
भगा दिए जाते थे वो
मेहनत-मजूरी की कीमत
पाई-पाई से नापते हो तुम
और दान देते वक़्त
दोनों हाथ धन लुटाते हो तुम
ये कैसी है दुनिया
ये कैसे हैं लोग
है ज़िंदों पे शक़
और मरों से मोह
वो समाज समाज नहीं
है चीलों का गिरोह
है जिसे ज़िंदों पे शक़
और मरों से मोह
सिएटल । 425-445-0827
30 जनवरी 2010
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हैटी = Haiti
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:31 PM
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Labels: news
Tuesday, January 26, 2010
भारत छोड़ो आंदोलन
गुर्रु पासपोर्ट
गुर्रु विसा
सुरूर भागने का सब पे चढ़ा
है भारत वो आज कहाँ
जो अंग्रेजों से था कभी लड़ा
जहाँ डाल-डाल पे उड़ने को
आतुर बैठी है चिड़िया
वो भारत देश है भैया
जहाँ सत्य, अहिंसा और धरम की
पग-पग उड़ती धज्जियाँ
वो भारत देश है भैया
जहाँ जो भी परिंदा
घर से निकला
लौट के फिर न आया
शौच के ढंग ने
सोच यूँ बदली
परदेस उसको भाया
भुल गया वो अपनी माटी,
अपने बापू-मैया
वो भारत देश है भैया
ये धरती वो जहाँ ॠषि-मुनि
जपते प्रभु नाम की माला
हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ
जहाँ अन्याय होता देख भी
उनके मुँह पे रहता ताला
जहाँ ईश्वर सबसे पहले खाए,
खाए खीर-सेवईयाँ
वो भारत देश है भैया
जहाँ आसमान से बाते करते,
नेता और सितारें
किसी नगर में, किसी समय पे,
किसी के काम न आते
उल्टा ठूँस-ठूँस वे माल दबाए,
दबाए करोड़ों रुपया
वो भारत देश है भैया
सिएटल 425-898-9325
(राजेन्द्र कृष्ण से क्षमायाचना सहित)
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:50 PM
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Labels: India
Thursday, January 7, 2010
वर्ष का आरम्भ
पहले प्रतीक्षा रहती थी वर्ष के आरम्भ की
क्यूंकि तब डायरी बदली जाती थी
पहले प्रतीक्षा रहती थी वर्षा के आरम्भ की
जो सावन की बदली लाती थी
अब कम्प्यूटर के ज़माने में डायरी एक बोझ है
और बेमौसम बरसात होती रोज है
बदली नहीं बदली
ज़िंदगी है बदली
बारिश की बूंदे जो कभी थी घुंघरु की छनछन
आज दफ़्तर जाते वक्त कोसी जाती हैं क्षण क्षण
पानी से भरे गड्ढे जो लगते थे झिलमिलाते दर्पण
आज नज़र आते है बस उछालते कीचड़
जिन्होने सींचा था बचपन
वही आज लगते हैं अड़चन
रगड़ते वाईपर और फिसलते टायर
दोनो के बीच हुआ बचपन रिटायर
बदली नहीं बदली
ज़िंदगी है बदली
कभी राम तो कभी मनोहारी श्याम
कभी पुष्प तो कभी बर्फ़ीले पहलगाम
तरह तरह के कैलेंडर्स से तब सजती थी दीवारें
अब तो गायब ही हो गए ग्रीटिंग कार्ड भी सारे
या तो कुछ ज्यादा ही तेज हैं वक्त के धारें
या फिर टेक्नोलॉजी ने इमोशन्स कुछ ऐसे हैं मारे
कि दीवारों से फ़्रीज और फ़्रीज से स्क्रीन पर
सिमट कर रह गए हैं संदेश हमारे
जिनसे मिलती थी कभी अपनों की खुशबू
आज है बस वे रिसाइक्लिंग की वस्तु
बदली नहीं बदली
ज़िंदगी है बदली
पहले प्रतीक्षा रहती थी वर्ष के आरम्भ की ...
सिएटल । 425-445-0827
7 जनवरी 2010
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वाईपर = wiper; टायर = tire; रिटायर = retire;
ग्रीटिंग कार्ड = greeting card; टेक्नोलॉजी = technology;
इमोशन्स = emotions; फ़्रीज = fridge;
स्क्रीन = screen; रिसाइक्लिंग = recycling
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:24 AM
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Labels: greetings
