शबरी के बेर की तरह
पहले मैं मूवी देखता हूँ
बाद में उसे दिखाता हूँ
यह प्रेम नहीं तो क्या है?
जब मैं नहीं मिलता हूँ
वह रो देती है
यह प्रेम नहीं तो क्या है?
जब मैं पहाड़ पर चढ़ जाता हूँ,
वह नाराज़ होती है
कुछ भी ख्याल नहीं रखते हो अपना
कुछ हो गया तो?
यह प्रेम नहीं तो क्या है?
जब मैं कहता हूँ चलो
वह चल पड़ती है
यह प्रेम नहीं तो क्या है?
राहुल उपाध्याय । 28 अप्रैल 2026 । सिएटल

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