Thursday, April 16, 2026

मुझे मिलना है तुमसे

मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


तुम किसी और के हो के भी 

न किसी और के हो

कभी-कभी तो लगता है कि 

नहीं इस दौर के हो


मैं हूं राधा 

और तुम किशन हो मेरे

सात जन्मों का नहीं

जन्मों-जन्मांतर का है साथ हमारा 

बांधेंगे हमें क्या सात वो फेरे


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी 


स्थूल काया का 

कोई भरोसा नहीं 

नौकरी करेगी

घर संभालेगी

इधर-उधर भटका करेगी


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी


मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल 





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