आज माँ नहीं है
फिर भी
नए कपड़े पहनते वक़्त
सोचता हूँ
आज पहनूँ
या तब
जब किसी बड़े के घर जाना हो
कोई जन्मदिन हो
तीज-त्योहार हो
बचपन में
जो मिडिल क्लास की मानसिकता
दिमाग़ में घर कर जाती है
वो
बैंक खाते को देख कर
निकल नहीं जाती
राहुल उपाध्याय । 28 मई 2026 । सिएटल

2 comments:
सुंदर
बचपन के संस्कार बहुत गहरे होते हैं या कहें बचपन साथ-साथ ताउम्र चलता है
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