उतना ही बड़ा है
जितनी कि तुम
(उम्र में!)
लेकिन
ये
वक्त के साथ
बदला नहीं
न रूप में
न रंग में
न ही किसी और ढंग में
आज भी
जब कोई बात कहता हूँ
तो सुन लेता है
पलट के जवाब नहीं देता है
जब चाहूँ
इसे देखूँ न देखूँ
जब चाहूँ
इसे चूमूँ न चूमूँ
न बुरा मानता है
न मनमुटाव करता है
बस एक बात की कमी है
अपने आप कुछ नहीं करता है
सारी बाज़ी
मेरे हाथ में दे रक्खी है
17 मार्च 2013
सिएटल । 513-341-6798
