Tuesday, January 26, 2021

सीनाज़ोरी

सत्तर वर्ष में 

सत्यमेव जयते 

जय श्री राम में बदल गया


और दावा यह

कि सबका साथ

सबका विकास 


हद होती है

सीनाज़ोरी की!


राहुल उपाध्याय । 26 जनवरी 2021 । सिएटल 

Sunday, January 24, 2021

बादल की बाट न जोहूँ

मेरे पास 

अभी भी 

सीडी प्लेयर है

सीडी हैं

डीवीडी प्लेयर है

डीवीडी हैं

टीवी का एंटीना है

रेडियो है

ताकि कल को अकाल पड़े

तो बादल की बाट न जोहूँ 


और कुछ भी न रहे

तो जब तक 

अगला प्राइम नम्बर अज्ञात है

समय बीताना नहीं एक बोझ है


राहुल उपाध्याय । 24 जनवरी 2021 । सिएटल 



Saturday, January 23, 2021

इतवारी पहेली: 2020/01/24


इतवारी पहेली:


ख़बर सुनाई रेडियो # ##

भाषण में गुर्राए फिर से ###


(नुक़्ते का फ़र्क़ है लेकिन सुनने में ख़ास अंतर नहीं है, सो मान्य है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 31 जनवरी को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 24 जनवरी 2021 । सिएटल


हल: ने ताजी / नेताजी















आँसू

प्याज़ भी नहीं खाते हम

कि

उसे काटूँ

तो आँसू निकले


सस्ती मिर्ची भी

इतनी तीखी नहीं 

कि मुझे रूला सके


मोह-माया भी

कुछ नहीं कि

कुछ खोऊँ 

तो रो पड़ूँ 


उसने

आज दिल से

दिल की बात कही

मेरी हर हरकत को 

नज़ाकत से

ख़ूबसूरती से

देखा, जाना, समझा

तो अनवरत आँसू बहें


कोई कैसे इतना

निर्मल 

निश्छल 

पवित्र हो सकता है


नोबल पुरस्कार 

तो कोई क्या देगा

लेकिन उसने जो प्यार दिया

वो किसी संस्था के बस की बात नहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 जनवरी 2021 । सिएटल 

छ: घण्टे

बात किए

छ: घण्टे गुज़र जाए

और बात न हो

पिंग का जवाब न मिले

तो ग़ुस्सा करती है

फिर उदास होती है

फिर चिन्ता करती है


फिर ख़ुद ही फ़ोन कर देती है

‘सब ठीक तो है?’


और सब ठीक हो तो

फिर ख़ैर नहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 जनवरी 2021 । सिएटल 

Thursday, January 21, 2021

दिल ❤️ ♥️ 💜💓💕💗💘❣️🥰💟💘💏

इतनी धौंस जमाती है

कि किसी से बात करूँ 

तो रूठ जाती है 


झट से बुरा मान जाती है

बात-बात पे चिढ़ाती है


एक मिनट चैन नहीं लेती है

हर सवाल का जवाब 

तुरंत चाहती है

न मिले तो ?? की बौछार

कर जाती है


सब ग़ुस्सा हवा हो जाता है

जब दर्जनों सेल्फ़ी 

फ़िल्टर और ईमोजी 

संग आ जातीं हैं


अब मेरे 

ईमोजी के 

की-बोर्ड में

टॉप पर

दिल ही दिल है


लाल दिल

गुलाबी दिल

बैंगनी दिल


दिल के ऊपर दिल

दिल के नीचे दिल

दिल के दाएँ दिल

दिल के बाएँ दिल

दिल से निकलता दिल 

दिल में घुसता दिल

तीर से घायल खुशहाल दिल

होंठों से बुलबुले सा

निकलता दिल!


❤️ ♥️ 💜💓💕💗💘❣️🥰💟💘💏


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2021 । सिएटल 



Monday, January 18, 2021

हम सब ग़रीब हैं

बेटे ने अपने पिता से माँगा खिलौना 

पिता ने मना कर दिया 

दादा ने अपने बेटे से माँगा हाथ ख़र्च 

बेटे ने मना कर दिया 


हम सब ग़रीब हैं


कभी दादा थे पिता 

और पिता था एक बेटा

पिता भी कभी दादा होगा

बेटा भी कभी पिता होगा 


बदलेगा बहुत कुछ 

मगर नहीं बदलेगी ग़रीबी


पिता ने झूठ बोला 

स्कूल में दाख़िले के लिए 

बेटे ने झूठ बोला 

वीसा लेने के लिए 

माँ ने झूठ बोला 

कस्टम्स से अचार निकालने के लिए 


हम सब फ़रेबी हैं 


बदलेगा बहुत कुछ 

मगर नहीं बदलेंगे फ़रेबी


माँ ने हार चढ़ाया देवी को 

नानी ने दावत दी पंडितों को 

पिता ने पूंजी लगायी बेटे की पढ़ाई में बेटे ने लगाई सेविंग्स स्टॉक मार्केट में 


हम सब जुआरी हैं 


बदलेगा बहुत कुछ 

मगर नहीं बदलेंगे जुआरी 


पिता ने फैलाई झोली इंग्लैंड में 

चाचा ने फैलाई झोली मिडिल ईस्ट में बेटे ने फैलाई झोली यू-एस में 


हम सब भिखारी हैं


बदलेगा बहुत कुछ 

मगर नहीं बदलेंगे भिखारी 


दक्षिणी उजड़ा तूफ़ान में 

बिहार डूबा बाढ़ में 

गुजरात दबा भूकंप में 


हम सब बदनसीब हैं


बदलेगा बहुत कुछ 

मगर नहीं बदलेगी बदनसीबी


राहुल उपाध्याय । 2001 । सेन फ़्रांसिस्को