सत्तर वर्ष में
सत्यमेव जयते
जय श्री राम में बदल गया
और दावा यह
कि सबका साथ
सबका विकास
हद होती है
सीनाज़ोरी की!
राहुल उपाध्याय । 26 जनवरी 2021 । सिएटल
सत्तर वर्ष में
सत्यमेव जयते
जय श्री राम में बदल गया
और दावा यह
कि सबका साथ
सबका विकास
हद होती है
सीनाज़ोरी की!
राहुल उपाध्याय । 26 जनवरी 2021 । सिएटल
मेरे पास
अभी भी
सीडी प्लेयर है
सीडी हैं
डीवीडी प्लेयर है
डीवीडी हैं
टीवी का एंटीना है
रेडियो है
ताकि कल को अकाल पड़े
तो बादल की बाट न जोहूँ
और कुछ भी न रहे
तो जब तक
अगला प्राइम नम्बर अज्ञात है
समय बीताना नहीं एक बोझ है
राहुल उपाध्याय । 24 जनवरी 2021 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:59 PM
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Labels: digital age
इतवारी पहेली:
ख़बर सुनाई रेडियो # ##
भाषण में गुर्राए फिर से ###
(नुक़्ते का फ़र्क़ है लेकिन सुनने में ख़ास अंतर नहीं है, सो मान्य है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 31 जनवरी को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 24 जनवरी 2021 । सिएटल
हल: ने ताजी / नेताजी
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:42 PM
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Labels: riddles, riddles_solved
प्याज़ भी नहीं खाते हम
कि
उसे काटूँ
तो आँसू निकले
सस्ती मिर्ची भी
इतनी तीखी नहीं
कि मुझे रूला सके
मोह-माया भी
कुछ नहीं कि
कुछ खोऊँ
तो रो पड़ूँ
उसने
आज दिल से
दिल की बात कही
मेरी हर हरकत को
नज़ाकत से
ख़ूबसूरती से
देखा, जाना, समझा
तो अनवरत आँसू बहें
कोई कैसे इतना
निर्मल
निश्छल
पवित्र हो सकता है
नोबल पुरस्कार
तो कोई क्या देगा
लेकिन उसने जो प्यार दिया
वो किसी संस्था के बस की बात नहीं
राहुल उपाध्याय । 23 जनवरी 2021 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:55 PM
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Labels: relationship
बात किए
छ: घण्टे गुज़र जाए
और बात न हो
पिंग का जवाब न मिले
तो ग़ुस्सा करती है
फिर उदास होती है
फिर चिन्ता करती है
फिर ख़ुद ही फ़ोन कर देती है
‘सब ठीक तो है?’
और सब ठीक हो तो
फिर ख़ैर नहीं
राहुल उपाध्याय । 23 जनवरी 2021 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:54 PM
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Labels: valentine
इतनी धौंस जमाती है
कि किसी से बात करूँ
तो रूठ जाती है
झट से बुरा मान जाती है
बात-बात पे चिढ़ाती है
एक मिनट चैन नहीं लेती है
हर सवाल का जवाब
तुरंत चाहती है
न मिले तो ?? की बौछार
कर जाती है
सब ग़ुस्सा हवा हो जाता है
जब दर्जनों सेल्फ़ी
फ़िल्टर और ईमोजी
संग आ जातीं हैं
अब मेरे
ईमोजी के
की-बोर्ड में
टॉप पर
दिल ही दिल है
लाल दिल
गुलाबी दिल
बैंगनी दिल
दिल के ऊपर दिल
दिल के नीचे दिल
दिल के दाएँ दिल
दिल के बाएँ दिल
दिल से निकलता दिल
दिल में घुसता दिल
तीर से घायल खुशहाल दिल
होंठों से बुलबुले सा
निकलता दिल!
❤️ ♥️ 💜💓💕💗💘❣️🥰💟💘💏
राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2021 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:02 PM
आपका क्या कहना है??
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Labels: relationship, valentine
बेटे ने अपने पिता से माँगा खिलौना
पिता ने मना कर दिया
दादा ने अपने बेटे से माँगा हाथ ख़र्च
बेटे ने मना कर दिया
हम सब ग़रीब हैं
कभी दादा थे पिता
और पिता था एक बेटा
पिता भी कभी दादा होगा
बेटा भी कभी पिता होगा
बदलेगा बहुत कुछ
मगर नहीं बदलेगी ग़रीबी
पिता ने झूठ बोला
स्कूल में दाख़िले के लिए
बेटे ने झूठ बोला
वीसा लेने के लिए
माँ ने झूठ बोला
कस्टम्स से अचार निकालने के लिए
हम सब फ़रेबी हैं
बदलेगा बहुत कुछ
मगर नहीं बदलेंगे फ़रेबी
माँ ने हार चढ़ाया देवी को
नानी ने दावत दी पंडितों को
पिता ने पूंजी लगायी बेटे की पढ़ाई में बेटे ने लगाई सेविंग्स स्टॉक मार्केट में
हम सब जुआरी हैं
बदलेगा बहुत कुछ
मगर नहीं बदलेंगे जुआरी
पिता ने फैलाई झोली इंग्लैंड में
चाचा ने फैलाई झोली मिडिल ईस्ट में बेटे ने फैलाई झोली यू-एस में
हम सब भिखारी हैं
बदलेगा बहुत कुछ
मगर नहीं बदलेंगे भिखारी
दक्षिणी उजड़ा तूफ़ान में
बिहार डूबा बाढ़ में
गुजरात दबा भूकंप में
हम सब बदनसीब हैं
बदलेगा बहुत कुछ
मगर नहीं बदलेगी बदनसीबी
राहुल उपाध्याय । 2001 । सेन फ़्रांसिस्को
Posted by Rahul Upadhyaya at 2:20 PM
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Labels: misc