Friday, January 16, 2026

नैन

कभी वो किसी के साथ होती है 

कभी मैं किसी के साथ 

हम चाहते हुए भी एक-दूसरे से

बात नहीं कर पाते हैं 

यही सोचकर ख़ुश हो जाते हैं 

कि हम कितनी क़िस्मत वाले हैं 

कि किन-किन हालातों से गुज़र के

हम छुप-छुप के नैन लड़ाते हैं 


राहुल उपाध्याय । 17 जनवरी 2026 । पुष्कर 





कभी जाप किया

कभी जाप किया, कभी नाम लिया 

जग में रह कर सब काम किया 


कभी जाग गया, कभी सो भी गया 

जग में रह कर सब भोग लिया 


कभी इश्क़ किया, कभी साथ दिया 

ख़ुद को सांचों में ढाल लिया


अच्छा-बुरा कुछ सोचा नहीं 

जो ठीक लगा उसे साध लिया 


कब होगा अंत कुछ ज्ञात नहीं

वक़्त के हाथों सब छोड़ दिया 


राहुल उपाध्याय । 16 जनवरी 2026 । दिल्ली 

Wednesday, January 7, 2026

पूछो न कैसे मैंने एप्प बनाई

पूछो न कैसे मैंने एप्प बनाई 

ना कोई डेव है, ना कोई पी-एम 

बिन क्यू-ए ही मैंने एप्प बनाई 


इक मिला कर्सर, इक कोपायलट

दोनों ने बना दी मेरी एप्प ये झटपट

हर्षत-गर्जत बाँछें खिल आईं


ना कोई यूज़र, ना कोई मार्केट

बिन फंड्स कैसे होगी यूएट 

तड़पत-तरसत आँख भर आई


राहुल उपाध्याय । 7 जनवरी 2026 । सिएटल 

Sunday, January 4, 2026

इतवारी पहेली: 2026/01/04

इतवारी पहेली:

नहीं मिलेगा दुनिया में ऐसा कोई ##
जहाँ हो कृष्ण को हाँ और राम # #

इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।

जैसे कि:

हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की

ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।

Https://tinyurl.com/RahulPaheliya

आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 जनवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।

राहुल उपाध्याय । 4 जनवरी 2025 । सिएटल

Re: इतवारी पहेली: 2025/12/28



On Sun, Dec 28, 2025 at 12:27 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


बारिश से बचने के हैं कुल # ### 

उनमें से एक है जाओ नीचे ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 4 जनवरी 2025 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 दिसम्बर 2025 । सिएटल 


Friday, January 2, 2026

खोज रही है जल जलमय अंखियाँ

का करूँ जल भी रास न आए 

खोज रही है जल 

जलमय अखियाँ 

पास ना पाए


जब भी कोई नेता आए 

मनवा मोरा काँपे 

का बतलाऊँ 

का समझाऊँ 

नैन के ये धारे

है मतवारे 

हाल हमारे

छुपे न छुपाए 

का का सुनाऊँ 

कैसे उजड़ी है बगिया


भोर भई और साँझ ढली रे

सूरज भी डूबे जाए

ये जग सारा

देखे तमाशा

दसियो रील बनाए

मैं घबराऊँ

डर-डर जाऊँ

कोई ना प्यास बुझाए

का के बुलाऊँ 

कहूँ बदले ये दुनिया 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल 



अपराध जिसे कहते हैं

अपराध जिसे कहते हैं 

गांधी ही से होता है 

वकील था वो लेकिन 

अब मौन वो योद्धा है 


चलता है यहाँ सब कुछ 

ज़िम्मेदार नहीं कोई 

बकना है जो बक दो

चुनाव ही तो होना है


आँगन में चले आते हैं 

पतझड़ के कई पत्ते 

कचरा इन्हें समझूँ 

या बरसा ये सोना है 


घर से थे चले तड़के 

कॉलेज में कहीं पढ़ने

तालीम ने कहा हमसे 

अब छोड़ जो छोड़ा है 


अंधा न कोई मजनूँ 

अंधी न कोई लैला 

है प्यार मगर जैसे

इक पल का खिलौना है 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल