Tuesday, April 15, 2008

15 अप्रैल

काम कर कर के कर दु:ख गए
फिर भी सरकार को दया न आई
कर के नाम पर छीन रही
गिन गिन कर एक-एक पाई

किस तरह की सरकार है पाई
सरेआम लुट रही मेरी कमाई

तरह तरह के उलटे-सीधे
कर दिये नियम इसने खड़े
उधार लो तो कर घटे
बचत करो तो कर बढ़े

छोटे बड़े सब फ़ंसे
उलट-गणित के चक्कर में पड़े
चार प्राणी का परिवार है
और खरीद रहे घर बड़े-बड़े

कर से ही सरकार चले
कर से ही देश फूले-फले
माना चलो बात सही है
पर टेढ़ी-मेढ़ी क्यूँ चाल चले?

कर लेना है तो पहले ले लो
बाद में क्यूं मेरे पीछे पड़े?
accountant की दुकान चले
TurboTax की महिमा बढ़े
उम्मीदवार जितने भी खड़े
हिम्मत नही जो इनसे लड़े

मंदिर-मंदिर जा जा कर
सुना रहा मैं दुखड़े बड़े
राम, कृष्ण, दुर्गा आदि
जितने भी भगवान खड़े
कोई तो एक अवतरित हो
और आ कर इन्हें तमाचा जड़े

कभी तो हमें राहत मिले
15 अप्रैल से छुट्टी मिले

सिएटल,
15 अप्रैल 2008

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2 comments:

Anonymous said...

rahul ji,
dukhti navs pe haat rakh di aap ne to...tax ki shaan mein aur 4 line hamare taraf se...

Kar kar kehke karte hai tang
Jo plans banaye who ho gaye bhang
To chalo aaj resolution lete hai sab milke sangh
Bhool jaun in paison ko,soch key yeh to hai zindagi ka ek ang

--dhananjaya(v-dharao@microsoft.com)

Anonymous said...

Very creative writing. I wanted to to you in the IHA conference, I missed you every time. I was hosting the book stall at this confeence.

Hari Bindal