Friday, August 27, 2021

रोका ना जाए दिलदार

https://youtu.be/YMyJmgG0L5E


रोका न जाए दिलदार

हाँ, हाँ जग ने किया है स्वीकार 


लाख जतन किए

लाख दुआएँ माँगी

रोकूँ किसी को

स्वप्न दफ़न हुए

आग लगा दी मैंने

अपने किसी को

पीड़ा हुई अपरम्पार 


अपने ही हाथों 

अपने किसी को मैंने

राख किया है 

उनकी बातें 

उनके वादों को

याद किया है 

आँसू भी आए कई बार


आखरी दुख दिया

आखरी दिन अब

दुख न वो देगा

जितना दिया बस

उतना दिया अब

सुख भी न देगा

सबसे किया नमस्कार 


अपने जहां में

कोई नहीं अब

घाव भरेगा

मुझसे उतना 

उससे भी आधा 

प्यार करेगा 

जो था वही था मेरा प्यार


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2021 । सिएटल 


इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


3 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 28 अगस्त 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Anuradha chauhan said...

बेहतरीन रचना

Preeti Mishra said...

खूबसूरत वर्णन