Tuesday, June 9, 2020

दर्द मिटे दवा ज़हर बने

दर्द मिटे दवा ज़हर बने
भूख मिटे ज़हर आहार
मन ऐसा बावला
करता जाए प्यार

चादर भी एक बोझ है
हो जाए जो भोर
कहे कविवर आप भी
चल दो घर की ओर 

रहे कोई जो ख़ुश सदा
थामे न कोई हाथ
जो दुख के दुखड़े रोए
पाए सबका साथ

मीरा जिससे प्रेम करे
है पत्थर न कछु और
मैं ही ऐसा बावला
दरियादिल घनघोर

फूल भी काँटा रखे
खुद की हिफ़ाज़त होय
राहुल तू क्यूँ ना करे
ढाल की जुगात कोय

राहुल उपाध्याय । 9 जून 2020 । सिएटल

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