Monday, June 15, 2020

चिता की गर्म आँच से

जग जाता है जग
चिता की गर्म आँच से
देह का कोई असर नहीं 
चाहे भरी हो गर्म साँस से

आँसू पूछते थे उसे
पोंछने वाले किधर गए?
क्या कहता वो उनसे
जो रूके नहीं और निकल गए?

हर तरफ़ है शुभचिन्तक 
हर तरफ़ उमड़ रहा प्यार है
ज़िन्दगी से जो हार गया
हार पा रहा उपहार है

यही हमारी रीत है
यही हमारा रिवाज है
जीते जी जो पसन्द नहीं
मरने पर रोते दहाड़ मार है

आओ रहें हम शांत क्यूँ
हम भी स्टेटस लगाएँगे
दो-चार दिन की बात है
फिर कुत्ते-बिल्ली लगाएँगे 

राहुल उपाध्याय । 15 जून 2020 । सिएटल

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1 comments:

अनीता सैनी said...

हृदय स्पर्शी सृजन .