Monday, June 29, 2020

जानवर

इंसान
कभी गाय है
तो कभी शेर

कभी कोल्हू का बैल
तो कभी गधा

कभी घोड़े सा फुर्तीला
तो कभी चींटी की चाल चलता

कभी अजगर सा सोता
तो कभी हाथी सा खाता

कभी दुम हिलाता कुत्ता
तो कभी भीगी बिल्ली 

कभी शरारती बंदर
तो कभी आस्तीन का सांप 

कभी भेड़
तो कभी ख़ूँख़ार भेड़िया 

और
उस दिन तो हद ही हो गई
कोई कहने लगा
मक्खी नहीं 
मधुमक्खी बनो
शहद बनाओ
मिठास लाओ

ये कैसी ज़बरदस्ती है
इंसान को
इंसान क्यों नहीं रहने देते?

और ऊपर से ताना भी
कि ज़्यादा मत बनो!

राहुल उपाध्याय । 29 जून 2020 । सिएटल

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