Sunday, June 21, 2020

सपना साकार हो जाए

कितनी अजीब बात है
तुमने भी उसी केरोसेल से
अपना सूटकेस उठाया होगा
जहाँ से मैंने कभी उठाया था
तुम भी उसी इमिग्रेशन की 
क़तार में खड़ी होगी
जिसमें कभी मैं खड़ा था
और यह भी तो हो सकता है 
कि तुम ठीक उसी सीट पर
बैठी हो
जिस पर मैं कभी बैठा था

आज भी मैं
एयरपोर्ट के
कई चक्कर लगाता हूँ
सोचता हूँ 
साथ नहीं हैं
तो क्या 
एक छत के नीचे होने का
सपना तो साकार हो जाए

राहुल उपाध्याय । 21 जून 2020 । सिएटल, अमेरिका

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