Monday, April 19, 2021

चाय बिना चैन कहाँ रे

https://youtu.be/jyxEHWE9VI8


चाय बिना चैन कहाँ रे

सोना नहीं चाँदी नहीं 

चाय तो पिला

अरे चाय भर दे


कोई नया सपना निगाहों में तो है

कोई नया साथी नयी राहों में तो है

दिल जो मिलेंगे तकदीर बनेगी

ज़िंदगी की नयी तस्वीर बनेगी

चाय ले ये कट और चार कर दे


यार हमें पेप्सी नहीं चाय चाहिए

अद्रक वाली ज़ायक़ेदार चाय चाहिए 

हीरे मोतियों से जड़ा कप ना तू दे

कुल्हड़ में बसा संसार चाहिए 

पारले जी भी दे के उपकार कर दे


राहुल उपाध्याय । 19 अप्रैल 2021 । सिएटल 

Saturday, April 17, 2021

इतवारी पहेली: 2021/04/18


इतवारी पहेली:


हर कुम्भ में हमें नज़र आते हैं ##

क्या बेसुरे हैं जो हम कहते हैं # #?


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 25 अप्रैल को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 18 अप्रैल 2021 । सिएटल















Friday, April 16, 2021

अनुबंध

हमारे अगले 33 साल के

अलिखित अनुबंधों की वजह से

मैं स्वस्थ रहूँगा 

जीवित रहूँगा 

हर संकट से उबर जाऊँगा


अनुबंध हैं

तो जीवन है


पिछले 13 सालों में

ऐसे ही कई अलिखित अनुबंधों ने

मुझे ताक़त दी थी

उम्मीद की राह दिखाई थी

लेकिन अफ़सोस 

कुछ तीन महीने

तो कुछ तीन साल में ही

ख़ारिज हो गएँ


शायद ये भी

रद्द हो जाएँ


कहते हैं 

हमारे शरीर में

रोज़ लाखों कोशिकाएँ 

बनती-बिगड़ती रहती हैं


शायद 

बनना-बिगड़ना ही

जीवन है


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2021 । सिएटल 





Tuesday, April 13, 2021

धोखा

भगवान भी

झूठ बोलते हैं 

धोखा देते हैं 

दुनिया की आँखों में धूल झोंकते हैं

अपनी सीता को छुपाकर

नक़ली का अपहरण करवाते हैं 

नक़ली की अग्नि परीक्षा का

स्वाँग रचते हैं 

और 

करोड़ों असली नारियों को

झुलसने को मजबूर कर देते हैं


राहुल उपाध्याय । 13 अप्रैल 2021 । सिएटल 


अरण्यकाण्ड के 24वें दोहे में पता चलता है कि सीताजी नहीं सीताजी के प्रतिबिम्ब का अपहरण हुआ था। 

चौपाई :

* सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला। मैं कछु करबि ललित नरलीला॥

तुम्ह पावक महुँ करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा॥1॥


भावार्थ:-हे प्रिये! हे सुंदर पतिव्रत धर्म का पालन करने वाली सुशीले! सुनो! मैं अब कुछ मनोहर मनुष्य लीला करूँगा, इसलिए जब तक मैं राक्षसों का नाश करूँ, तब तक तुम अग्नि में निवास करो॥1॥


* जबहिं राम सब कहा बखानी। प्रभु पद धरि हियँ अनल समानी॥

निज प्रतिबिंब राखि तहँ सीता। तैसइ सील रूप सुबिनीता॥2॥


भावार्थ:-श्री रामजी ने ज्यों ही सब समझाकर कहा, त्यों ही श्री सीताजी प्रभु के चरणों को हृदय में धरकर अग्नि में समा गईं। सीताजी ने अपनी ही छाया मूर्ति वहाँ रख दी, जो उनके जैसे ही शील-स्वभाव और रूपवाली तथा वैसे ही विनम्र थी॥2॥

* लछिमनहूँ यह मरमु न जाना। जो कछु चरित रचा भगवाना॥

दसमुख गयउ जहाँ मारीचा। नाइ माथ स्वारथ रत नीचा॥3॥


भावार्थ:-भगवान ने जो कुछ लीला रची, इस रहस्य को लक्ष्मणजी ने भी नहीं जाना। स्वार्थ परायण और नीच रावण वहाँ गया, जहाँ मारीच था और उसको सिर नवाया॥3॥



 



Saturday, April 10, 2021

इतवारी पहेली: 2021/04/11


इतवारी पहेली:


हो देख उसे ऐसी ### ##

कि लूँ दस बाल्टी ## ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 अप्रैल को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 11 अप्रैल 2021 । सिएटल















बीमारी कोई भड़के

https://youtu.be/YufiMNWTDRo


बीमारी कोई भड़के तो लॉकडाउन उसे दबाए

लॉकडाऊन में जो चुनाव कराए उसे कौन जीताएँ

संकट में जो नैया अटके उसे श्रमिक पार लगाए

जो श्रमिक काम को तरसेउसे कौन दिलाए


हमसे मत पूछो कैसे मसला बिगड़ा वायरस का

लोगों की बात नहीं है ये किस्सा है हम सब का

कोई वायरस सेंध लगाये तो मास्क जिया बचाए

मन मीत न मास्क लगाए उसे कौन बचाए


न जाने क्या हो जाता जाने हम कब के मर जाते

घर पे हैं तो ज़िन्दा है न होते तो मर जाते

दुनिया जो वादा रखे मुसीबत टल भी जाए

आफ़त जो आप बुलाए उसे कौन बचाए


माना तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसीका

मौजों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का

मँझधार में नैया डोले तो माँझी पार लगाए

माझी जो नाव डुबोएउसे कौन बचाए


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 9 अप्रैल 2021 । सिएटल 


Thursday, April 8, 2021

तुम कैसे रोग हो?

https://youtu.be/dh0YNHz2JO0


जहाँ मैं जाता हूँ वहीं चले आते हो

चोरी-चोरी मेरे तन में समाते हो

ये तो बताओ कि तुम कैसे रोग हो


सर से पाँव तक अगन की ये बात है

दिन की रात की थकन की ये बात है

ये तो बताओ कि तुम कैसे रोग हो


ओ, मैं तो मास्क लगाऊँगा

करनी तुम्हारी से बच जाऊँगा     

खैर जो चाहो चले जाओ मेरे दर से

छोड़ो ये आना-जाना मेरे नगर से

ये तो बताओ कि तुम कैसे रोग हो


ओ, तूने क्यों दु:ख दिया है

रोग दे कर चैन ले लिया है

किसी बड़े ज्ञानी-ध्यानी को बुलाओ

अभी-अभी यहीं फ़ैसला कराओ

उनसे पूछेंगे हम तुम कैसे रोग हो


ओ, अपने अब हैं बेगाने

कहना हमारा अब कौन माने

ये तो बताओ कि तुम कैसे रोग हो


(शैलेंद्र से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 8 अप्रैल 2021 । सिएटल