Sunday, January 8, 2023

यदि मैं जानता कि


यदि मैं जानता कि

प्यार क्या है 

मैं कभी नहीं करता


यदि मेरे हाथ में 

सब कुछ होता 

मैं जन्म नहीं लेता


 जानने में

 नियंत्रण में होने में

जो सुख है 

वह व्यक्त नहीं किया जा सकता 


पूरी यात्रा 

कैसी होगी 

पहले से पता हो

तो वह यात्रा पूरी नहीं हो सकती

पूरी तो क्या 

आरम्भ ही नहीं होती

विशेषकर तब

जब उसका अंत दुःखद हो


राहुल उपाध्याय  8 जनवरी 2023  द्वारका 



Friday, January 6, 2023

आज अज्ञेय होते


आज अज्ञेय होते

तो व्हाट्सएप पर जूझ रहे होते

कुमार विश्वास और मोदी के बीच

कुढ़ रहे होते

न नाव होती, न द्वीप होते

कोई भड़काऊ विषय 

ढूँढ रहे होते


जैसे मनोज मुड़े 

वे भी मुड़ गए होते

देश भक्ति को 

ओढ़ रहे होते

कभी बांग्लादेशी

तो कभी किसी अमुक का

विरोध कर रहे होते

मेरा भारत महान के

क़सीदे पढ़ रहे होते


मातृ-दिवस पर 

मुस्करा कर आँख भिगो रहे होते

किसी शहीद दिवस पर

माखनलाल चतुर्वेदी को भी 

मात दे रहे होते

दशहरे पर 

रावण के नए प्रतीक

बता रहे होते

हमें क्या नहीं पढ़ाया गया

हमसे क्या छुपाया गया

सब बता रहे होते


शिवा ट्रिलोजी

या टू स्टेट्स 

लिख रहे होते


आज अज्ञेय होते

तो यूट्यूबर होते 

उनकी एक टीम होती

दस कैमरे होते

हर एंगल से उनको

देख रहे होते

उनके फ़ार्महाउस पर

उनके आगे-पीछे घूमते

कभी गाय की सेहत

तो कभी बाजरे की रोटी की

बात कर रहे होते

कभी बड़ा माइक्रोफ़ोन होता

तो कभी ठुड्डी के नीचे छोटा सा

बटन सा टिका होता

कविता सुनाते-सुनाते बीच में

लाईक/सब्सक्राइब/कमेंट का आदेश 

स्क्रोल कर रहा होता


आज अज्ञेय होते

तो नाम कमाने के लिए 

कितने खटकर्म कर रहे होते


राहुल उपाध्याय । 7 जनवरी 2023 । माधवपुर (गुजरात)

Thursday, January 5, 2023

आधी ग़लत जो

आधी ग़लत जो

आधी नहीं है 

चलती वो दुनिया 

फलती नहीं है 


लड़कियाँ हैं लक्ष्मी

शान हैं घर की

पंख लगाकर 

उड़ती नहीं हैं


पंख मिले हैं 

क़सूर क्या है तेरा

फैला दे उनको

तू बंदी नहीं है 


पूजने हैं पत्थर

खानी है दवाई

करना है क्या ये

सफ़ाई नहीं है 


दीप बुझाती

चूल्हा जलाती 

फूँक भी देखो

कसाई नहीं है


राहुल उपाध्याय । 5 जनवरी 2023 । गाँधीधाम


Tuesday, January 3, 2023

क्या दूँ तुम्हें

क्या दूँ तुम्हें 

क्या मैं नहीं 

दिन भर यही सोचता हूँ 

कभी सोचूँ ये लूँ 

कभी सोचूँ वो दूँ 

क्या दूँ तुम्हें सोचता हूँ 


सोचा है तुम्हें कोई साड़ी दिलाए

पार्क में जा के कोई पिकनिक मनाए

घर पे बैठे कानों में बाली पहनाए

हाथ के कंगन और झूमके भी लाए

हाय रे ना ना, हाय रे ना ना

ये ना देना


कार्ड दे दूँ तुम्हें जो चाहे ले लो

अपनी पसन्द का कोई सामान ले लो

ख़्वाब भी होंगे तुम्हारे अपने सुहाने

ख़्वाब पूरे करो जो चाहे ले लो

हाय रे ना ना, हाय रे ना ना

ये ना देना, 


राहुल उपाध्याय । 4 जनवरी 2023 । छायापुरी 

आओ हम मिल के नया इक संसार रचें


आओ हम मिल के नया इक संसार रचें 

जो भी आए उसे जी भर के हम प्यार करें


कब कहाँ ख़ुद से भला किसने ख़ुशी पाई है 

एक साथी की ज़रूरत हम सबको आई है

साथ में सब हो तो सब सबका ख़्याल रखें


एक दूजे केहर तरीक़े सेहम काम आएँ

कोई संकट होहाथ छोड़े नासदा पास जाएँ

फ़ासले दिल के  होंघटते हर बार रहें


साँस टूटे नाआग भड़के नाहर तरफ़ हो अमन

रंग हज़ारों सेचाँद सितारों सेहाँ भरा हो चमन

साथ में सबको लेकर हम सदा साथ चलें 


राहुल उपाध्याय  3 जनवरी 2023  बयाना


क्या है मुझमें कि वो


कोई ये कैसे बताए कि 

वो इतना प्यारा क्यूँ है?

क्या है मुझमें कि वो

मुझको बुलाता क्यूँ है?

है वो बुलाता तो

फिर डर जाता क्यूँ है?

यही दुनिया है तो फिर 

ऐसी ये दुनिया क्यूँ है


हाँ ये माना कि चाह के भी 

 मिल पाना है दुखकर

किसी से मिल के बिछड़ने का

दुख ज़्यादा क्यूँ है?


वो जो मिलता है तो 

मिलता है गले लगकर 

वो जब जाता है तो

हाथ हिलाता क्यूँ है?


देकर इक नींद में 

सपन-सलोना वो

जगाता क्यूँ हैं?

आग को आग

दिखाकर वो

हटाता क्यूँ है?

मीठा इक दर्द

जगाकर वो

सताता क्यूँ है?


है वो दिल में तो

दिल में क्यूँ है?


बुफे में पेट भर खा के भी

भूख लग जाती क्यूँ है?


यही होता है तो 

आख़िर यही होता क्यूँ है


राहुल उपाध्याय  3 जनवरी 2022  कानपुर 









Sunday, January 1, 2023

अफ़ग़ानी

अफ़ग़ानी होने का 

यह फ़ायदा है कि

आप सड़क पर 

काजू-बादाम-पिस्ता बेच सकते हो


आदमी सच्चा हो तो

उसकी हर चीज़, हर बात

विश्वसनीय लगती है 


वरना कौन जानता है कि

ये किस खेत का मेवा है?


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2023 । लखनऊ