Wednesday, January 11, 2023

तुम्हारी तस्वीर


तुम्हारी तस्वीर दिखा कर

पूछने लगी

बहुत मिस करते हो उसे?

कह दिया कि

तुम हवा हो

 दिखो तो भी सदा साथ हो

तुम हो

तो मैं हूँ 


-*-*-*-


तुम तो जानती ही हो

(इश्क़ और मुश्क कभी छुपाए छुपे हैं?)

मुझे 

तुमसेउससेसबसे

प्यार है

और यह

एकतरफ़ा प्यार नहीं है

दरअसल 

प्यार एकतरफ़ा हो ही नहीं सकता


-*-*-*-


उसने सोचा

तुम्हारी तस्वीर दिखा कर

वो मेरा भला कर रही है 

कह नहीं सकता 

कितना दुख हुआ मुझे 

तुम्हें खुश देख कर


मैं तो सोचता था कि हम

ताउम्र उदास रहेंगे 

तुम लैला सी उदास

मैं मजनूँ सा बदहवास 

बाल बढ़ाएदाढ़ी बढ़ाए

सहराओं में भटकता रहूँगा


मगर ये हो  सका

और अब ये आलम है कि

तुम सजती होसँवरती होनिखरती हो

और मैं ठहाके लगाता हूँ 

एक पागलपन की हद तक

खुश नज़र आता हूँ 


-*-*-*-


मैं तो शुरू से ही जानता था कि

तुम मेरी नहीं हो सकती

और इसीलिए मैंने तुमसे

कभी कुछ कहा नहीं 

लेकिन तुम सब समझ गई

(इश्क़ और मुश्क कभी छुपाए छुपे हैं?)

तुम क्यासब समझ गए

(इश्क़ और मुश्क कभी छुपाए छुपे हैं?)

तुम वीरांगना निकली

प्यार किया तो डरना क्या वाले मोड में  गई

तुम और क़रीब आई

और इतनाइतनाइतना प्यार दिया कि

इस जन्म में 

बता पाना मुश्किल है 

लेकिन समय बदलते क्या देर लगती हैं 

तुमने भी हथियार डाल दिए


अब तुम हो 

उस तरफ़ 

और मैं 

इस तरफ़ 


और ये दीवार जो हम दोनों के बीच है

ये कब तक रहेगीनहीं जानता

प्रयास तुम्हें ही करना होगा 

मुझे तो दिखती ही नहीं 


राहुल उपाध्याय  11 जनवरी 2023  





सब के सब कुछ ना कुछ हैं माँग रहे

सब के सब कुछ ना कुछ हैं माँग रहे

जो नहीं उनका उनको माँग रहे


हाथ में है वो नहीं 

साथ में है वो नहीं 

ढूँढ रहे हैं हर घड़ी 

पास में है जो नहीं 

छोड़ कर अपना जहां 

पा रहे हैं कुछ कहाँ


ये नहीं है वो नहीं 

रोज़ रोते हैं यही

जाकर फिर कहीं 

रोज़ रोते हैं यही 

छोड़ कर अपना जहां 

पा रहे हैं कुछ कहाँ 


राहुल उपाध्याय । 11 जनवरी 2023 । गाँधीधाम



Monday, January 9, 2023

यदि मैं जानवर होता


यदि मैं जानवर होता

कब का अलग हो गया होता

 वो फ़ोन करती 

 मैं फ़ोन करता 

 वो वकील करती

 मैं कलप जाता 

 वो हिसाब माँगती

 मैं हिसाब देता

घोंसलों पे हमारे

बिकाऊ  लिखा होता

एक दूसरे के प्रति

उपद्रव  हुआ होता


 मैं जानवर हूँ 

 जानवर बनूँगा 

उससे रिश्ता तोड़कर

ख़ुद का ख़्याल रखूँगा 

किसी एक का  होकर

सबसे प्यार करूँगा 


राहुल उपाध्याय  9 जनवरी 2023  खम्भालियागुजरात 

Sunday, January 8, 2023

कोई आकर घर को फिर जाता नहीं


कोई आकर घर को फिर जाता नहीं 

ठाठ हो सौ मगर सो पाता नहीं 


छोड़ कर वो एक घरएक माँ

साहिलों पे भी सुकूं पाता नहीं 


जोड़ कर वो एक करोड़दो करोड़ 

एक भी नम्बर पर रूक पाता नहीं 


हम भी होंगे एक दिन कामयाब 

कहनेवाला ख़ुद समझ पाता नहीं 


आग हैहाथ जलेंगेहै जानता

फिर भी ख़ुद को रोक पाता नहीं 


जान हैजानी है इक दिनजाएगी

रोकने की ज़िद को रोक पाता नहीं 


राहुल उपाध्याय  9 जनवरी 2023  द्वारका 

एक फ़ोन की वजह से


एक फ़ोन की वजह से

कितने पेड़ बच गए 

अब कोई काग़ज़ पर कुछ नहीं लिखता

सब व्हाट्सएप पर शेयर हो जाता है 

फ़ोन नम्बर 

फ़ोटो 

डॉक्यूमेंट 

लोकेशन 


अगर कुछ कहीं लिखा भी है 

तो फ़ोटो खींच ली


अब किसी काग़ज़ की 

10 फ़ोटोकॉपी नहीं बनती

फ़ोटो ही ले ली जाती है 


एक फ़ोन की वजह से

कितना समय और पैसा बच गया

शहर के सारे रिश्तेदारों से

बिना ऑटो में बैठे

या कार निकाले

घर बैठे ही बात कर ली

पाँच मिनट पहले देवरानी से की

पाँच मिनट बाद जेठानी से कर ली


एक फ़ोन की वजह से 

कितने लोग रोना भूल गए

बच्चे कॉलेज में हैं

होस्टल में हैं

पी-जी में हैं

याद आई नहीं कि

वीडियो कॉल कर लिया

रोना किस बात का?


एक फ़ोन की वजह से 

कितनी लाइनें ख़त्म हो गई

ट्रेन का टिकट

बस का टिकट 

थियेटर का टिकट

बिजली का बिल

फ़ोन का बिल

सब कहीं से भी ले लोभर दो

कहीं जाने की ज़रूरत नहीं 

चौबीसों घंटो

यह सोता भी नहीं 


एक फ़ोन की वजह से 

कितना ज्ञान हासिल हो गया है 

हर शहर से हर शहर की दूरी

कितने घंटे

कितने मील है

सब पता कर ली


एक फ़ोन की वजह से

कितने पाप कम हो गए

मन्दिर जाने के बहाने बन्द हो गए

झूठ कम बोलना पड़ता है

चारों तरफ़ सुख-शांति है

सब अपने-अपने हाथों से

अपनी आँखों से 

किसी सुहावने संसार में

पहुँच जाते हैं 

जहां सब व्यवस्थित है

कहीं कोई गंदी नाली नहीं है

बिखरे हुए कपड़े नहीं हैं 

गंदे बर्तन नहीं हैं

गीज़र में ठंडा पानी नहीं है 

दीवारों में सीलन नहीं है

छिपकली नहीं है 

मच्छर नहीं है


कितने जीवन निखर गए

दाम्पत्य जीवन सुधर गए


राहुल उपाध्याय  8 जनवरी 2023  द्वारका