Sunday, January 8, 2023

कोई आकर घर को फिर जाता नहीं


कोई आकर घर को फिर जाता नहीं 

ठाठ हो सौ मगर सो पाता नहीं 


छोड़ कर वो एक घर, एक माँ

साहिलों पे भी सुकूं पाता नहीं 


जोड़ कर वो एक करोड़, दो करोड़ 

एक भी नम्बर पर रूक पाता नहीं 


हम भी होंगे एक दिन कामयाब 

कहनेवाला ख़ुद समझ पाता नहीं 


आग है, हाथ जलेंगे, है जानता

फिर भी ख़ुद को रोक पाता नहीं 


जान है, जानी है इक दिन, जाएगी

रोकने की ज़िद को रोक पाता नहीं 


राहुल उपाध्याय । 9 जनवरी 2023 । द्वारका 

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